गोंडा। तेज हवाओं व गेहूं की कटाई-मड़ाई का असर अस्थमा व सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मरीजों के सेहत पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
शुक्रवार को फिजीशियन डॉ. अखिलेश त्रिपाठी की ओपीडी में 86 मरीजों का उपचार हुआ, जिसमें 22 मरीज सांस व अस्थमा से संबंधित रहे। अन्य फिजीशियन की ओपीडी में भी सांस के मरीजों की संख्या अधिक रही। चिकित्सक ने बताया कि गांवों में गेहूं की मड़ाई शुरू होने के बाद सांस के मरीजों की संख्या बढ़ी है। गांव में गेहूं की कटाई व मड़ाई के दौरान भारी मात्रा में धूल व भूसे का करण उड़ता है, जो फेफड़े में जमा हो जाता है। वहीं तेज हवा चलने के कारण सड़कों की धूल भी लोगों के फेफड़े तक पहुंच रही है। ऐसे में अस्थमा व सीओपीडी के पुराने मरीजों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। मड़ाई कराते समय मुंह व नाक को गमछे से ढक लेना चाहिए। पुराने मरीज नियमित दवा लेते रहें। समस्या बढ़ने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श करें।