गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग के फर्नीचर घोटाले में अब कार्रवाई का दायरा बढ़ने लगा है। रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित बीएसए अतुल कुमार तिवारी के बाद अब दो जिला समन्वयक निशाने पर हैं। पुलिस ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। डिजिटल साक्ष्यों, बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जा रही है।
स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) कोर्ट नंबर-5, गोरखपुर के आदेश पर बीएसए अतुल तिवारी, डीसी (जेम) प्रेमशंकर मिश्र और डीसी (सिविल) विद्याभूषण मिश्र के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। फिलहाल निलंबित बीएसए की जांच सहायक शिक्षा निदेशक लखनऊ कर रहे हैं।
गुरुग्राम स्थित नीमन सीटिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के एमडी मनोज पांडेय ने इन अधिकारियों पर 16 करोड़ रुपये के टेंडर में 15 प्रतिशत कमीशन (2.25 करोड़ रुपये) मांगने का आरोप लगाया था। आरोप है कि 26 लाख रुपये की पहली किस्त चार जनवरी को बीएसए के आवास पर दी गई थी, जबकि शेष रकम न देने पर कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट करके मुकदमा दर्ज करा दिया था।
गोरखपुर की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट के आदेश पर बीएसए व दो जिला समन्वयकों पर शासन की ओर से कार्रवाई शुरू होने के बाद अब पुलिस की जांच की दिशा भी बदल गई है। मामले की जांच कर रहे सीओ सिटी आनंद कुमार राय का कहना है कि तथ्यों का गहनता से अध्ययन किया जा रहा है।
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फाइलों और खातों की हो रही छानबीन
सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल चैट और सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस टीम बुधवार को भी बीएसए कार्यालय पहुंची। विभागीय अधिकारी गुपचुप तरीके से पुराने टेंडर और भुगतान की फाइलें देखने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। शासन स्तर से पूरे प्रकरण की मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है।
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पसरा रहा सन्नाटा
पंतनगर स्थित बीएसए कार्यालय में बुधवार को खामोशी रही। दोपहर एक बजे बीएसए का कमरा बंद रहा। पता चला कि बीएसए का कामकाज देख रहे बीईओ राम खेलावन सिंह बैठक में गए हैं। विभाग के कई कमरों में ताला लटका था। कर्मचारी इस मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।