छपिया के स्वामीनारायण मंदिर में भजन कीर्तन करते श्रद्धालु। -संवाद
करनैलगंज। चंद्रग्रहण के बाद सोमवार को भोर चार बजे से ही सरयू घाट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। रात्रि करीब डेढ़ बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद से ही तमाम लोग सरयू तट पर पहुंचकर भजन-कीर्तन करने लगे। भोर होते ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया।
श्रद्धालुओं ने सरयू नदी के कटरा घाट, सकरौरा घाट, कटरा शाहबाजपुर घाट, यमदुतिया घाट और कचनापुर घाट पर स्नान कर पूजा-पाठ और दान किया। मान्यता के अनुसार, ग्रहण के बाद बिना स्नान किए कुछ भी खाना-पीना वर्जित माना गया है। साथ ही दान करने की भी परंपरा है। इस मौके पर मेले का आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। इससे पहले रात्रि में ग्रहण के दौरान मंदिरों में रामनाम संकीर्तन होता रहा। तमाम स्थानों पर ओम नमो भगवते वासुदेवाय की ध्वनि गूंजती रही।
मसकनवा संवाद के मुताबिक चंद्रग्रहण के अवसर पर भगवान घनश्याम महाराज की जन्मस्थली स्वामी नारायण मंदिर छपिया में रविवार रात हरि धुन का आयोजन किया गया। वाद्य यंत्रों की धुन पर ‘स्वामी नारायण, स्वामी नारायण’ के उच्चारण से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। ग्रहण समाप्त होने के बाद रात करीब 01:30 बजे मंदिर के महंत देव स्वामी सहित अन्य संतों और हरिभक्तों ने मंदिर के सामने स्थित पवित्र नारायण सरोवर में स्नान किया। गुरु जगत प्रकाश स्वामी, कोठारी विष्णु स्वामी, हरिदर्शन स्वामी, सागर भगत, गुजरात से आए प्रिय बल्लभ स्वामी, घनश्याम स्वामी, देवानंद पांडेय सहित बड़ी संख्या में हरिभक्त हरि धुन और नारायण सरोवर में स्नान में शामिल हुए। इसके साथ ही शहर के दुखहरणनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजन किया।