गोंडा। कोविड-19 संकट के कारण अप्रैल 2020 से बेसिक स्कूलों में पढ़ाई बंद चल रही है। दस महीने बाद अब 10 फरवरी से कक्षा 6 से 8 तक के स्कूलों में पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने बताया कि 50 फीसदी बच्चों के रोस्टर से स्कूलों में पढ़ाई की जाएगी।
इसके अलावा स्कूलों में साफ- सफाई के साथ ही रसोई की तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल में आने वाले बच्चों की स्वच्छता पर विशेष जोर दिया जाना है।
शासन के फैसले के बाद जिले के 900 जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ाई शुरू कराने की तैयारी शुरू हो गई है। कई ब्लाकों में संकुल बैठकों में प्रधानाध्यापकों को व्यवस्था बनाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा पहली मार्च से दो हजार से अधिक प्राथमिक स्कूलों को खोले जाने की तैयारी भी अभी से करने को कहा गया है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि कक्षों में पढ़ने वाले बच्चों का रोस्टर तैयार कर लिया जाए।
पहले दिन 50 फीसदी बच्चों को बुलाया जाए और दूसरे दिन शेष 50 फीसदी बच्चों को बुलाया जाए। इस तरह रोस्टर की जानकारी बच्चों के अभिभावकों को शिक्षक दे दें। इसके अलावा प्रबंध समितियों की बैठक भी पूरी कर लें।
बच्चों में कोविड 19 के प्रोटोकाल का पालन कराने पर जोर दें और पढ़ाई के दौरान पूरी सतर्कता बरतें। बच्चों के हाथ धुलने के बारे में भी सतर्क करें। इसी तरह प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को भी जरूरी जानकारी दें। जिससे कोई दिक्कत न होने पाए। इसके अलावा स्कूल में बच्चों को मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी दिया जाए।
कोविड़-19 संकट के दौरान शिक्षकों को छूट नहीं मिल सकी थी। संकट के दौरान भी शिक्षकों को जून से ही स्कूल बुुला लिया गया था। उन्हें कोई पढ़ाई तो नहीं करानी थी लेकिन स्कूल में आपरेशन कायाकल्प कराने के साथ ही अन्य कई तरह के कार्यों को सौंपा गया।
बिना बच्चों के स्कूल आ रहे शिक्षकों को दिक्कत भी हो रही थी। उस समय शिक्षकों ने मोहल्ला क्लास का संचालन भी शुरू किया। गावों में योग आदि भी कराने का काम किए। लेकिन बच्चों के बिना स्कूल में पूरे समय बीताना भारी पड़ रहा था। अब बच्चों के आने से उन्हें राहत मिली है।
कोविड का संकट टले बिना ही स्कूलों में बच्चों को बुलाए जाने के आदेश हो गए हैं। भले ही कागजों में कोविड प्रोटोकाल की बात कही जा रही हो लेकिन कई तरह की समस्याएं बनी हुईं हैं। गावों के छोटे बच्चों का मास्क में स्कूल आने की उम्मीद बहुत ही कम है। वैसे ही डिग्री से इंटर कालेजों को खोला गया है, वहां भी सभी बच्चे मास्क में नहीं दिखते। अब परिषदीय स्कूलों में बच्चों के मास्क में आने की संभावना कम ही है।