गोंडा। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की एक महिला के इलाज में घोर लापरवाही सामने आयी है। चिकित्सकों ने जिस महिला को उसके पेट में पथरी, गैस होने से दर्द होने की शिकायत पर इलाज किया, उस महिला ने जिला अस्पताल में बच्चा जना। महिला की इलाज के दौरान न तो वजीरगंज ब्लाक अस्पताल के न ही जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने महिला के प्रेग्नेंसी की जांच करायी। महिला के पेट में दर्द की शिकायत पर उसके पेट दर्द का इलाज शुरू कर दिया गया। यह तो कहिए महिला व उसके नन्हीं बच्ची की किस्मत अच्छी थी कि चिकित्सकों की ओर से पेट में दर्ज होने पर सुई दवा देने से कोई जिस्मानी सेहत को नुकसान नहीं हुआ। चिकित्सकों की इस लापरवाही से जच्चा बच्चा के जान का भी खतरा बन सकता था। इस समय जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं।
जिले के वजीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के ग्राम बसंती दूबे पुरवा निवासिनी मैना देवी का कहना है कि जब उसके पेट में दर्ज हुआ तो वह वजीरगंज ब्लॉक के अस्पताल से दवा लेने गयी तो वहां के चिकित्सक ने पेट में पथरी व गैस होने की बात बताकर इलाज किया। दर्द ठीक न होने की शिकायत पर उसे चिकित्सकों ने जिला अस्पताल जाकर दिखाने को भेज दिया। मैना देवी जब अपने घर के लोगों के साथ रविवार को भोर में बाबू ईश्वर शरण सिंह जिला अस्पताल पहुंची तो इमरजेंसी के चिकित्सक ने महिला के पेट में दर्द होने की शिकायत पर उसकी जांच नही की। उसे सुई दवा देकर अस्पताल में भर्ती कर लिया। महिला को महिला वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
महिला को जानकारी न होने पर उसे कुछ देर बाद तेज प्रसव पीड़ा हुई इसके बाद महिला ने जिला अस्पताल के बाथरूम में गई जहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। इस बात की जानकारी होने पर वार्ड में भर्ती मरीजों ने स्टाफ को जानकारी दी इसके बाद महिला व उसके बच्चे को बेड पर लिटाया गया। नार्मल डिलेवरी हो जाने पर जच्चा-बच्चा स्वस्थ्य बताया गया है। लेकिन इस महिला के इलाज में चिकित्सकों की ओर से घोर लापरवाही किया गया है। चिकित्सक ने यदि महिला की शिकायत को गंभीरता से लेकर उसका चेकअप किया गया होता तो पहले ही महिला के प्रेगनेंट होने की बात सामने आ जाती। बताया जाता है कि महिला को पेट दर्द होने पर उसे दवा व इन्जेक्शन भी लगाया गया, लेकिन उसकी किस्मत ठीक रही की महिला व उसके बच्ची को कोई नुकसान नहीं हुआ। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की माने तो गर्भवती महिलाओं को आयरन, कैल्शियम व जरूरी टीका के अलावा कोई दवा सुई नहीं दी जाती है।
इलाज करने वाले चिकित्सकों के अपने अपने तर्क
वजीरगंज के सीएचसी अधीक्षक ने किया इनकार
गोंडा। महिला के पेट में पथरी व गैस होने की कस्बे के अस्पताल में इलाज किये जाने के मामले में सीएचसी अधीक्षक आशुतोष शुक्ला ने इनकार किया है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में मैना देवी नाम के महिला के बच्चा होने की जानकारी मिली है। लेकिन वह उनसे न तो कभी मिली है न ही उसका पिछले तीन माह तक उसका सीएचसी पर इलाज हुआ है। उन्होंने बताया कि अभिलेख चेक किया गया है मैना देवी नाम की महिला का सीएचसी पर कोई इलाज नही हुआ है। किसी रजिस्टर में उसका नाम दर्ज नही है।
ईएमओ बोले महिला ने नही दी गर्भवती होने की जानकारी
जिला अस्पताल में मैना देवी को उसके पेट में दर्द होने का इलाज करने के बाद उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कर लेने वाले डॉ. एनके गुप्ता ने तर्क दिया कि भोर में महिला आयी थी उसने पेट में दर्द होना बताया था। उसने अपने को गर्भवती होने की जानकारी नही दी। इससे यह माना गया कि उसे पेट की बीमारी है इस पर उसे भर्ती कर लिया गया। कुछ देर बाद उसे बच्चा पैदा हुआ। उन्होंने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनो स्वस्थ हैं उन्हें टीका लगाने आदि के लिए जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया था।
जिला अस्पताल में नही है महिला डॉक्टर की तैनाती
गोंडा। 35 लाख की आबादी वाले जिले के जिला चिकित्सालय में एक भी महिला चिकित्सक की तैनाती नही है। इमरजेंसी में यदि कोई महिला किसी भी गंभीर बीमारी की दशा में आ जाए तो उसका चेकअप करने के लिए एक भी महिला चिकित्सक नही है। यह एक बड़ी विडंबना है कि जल्दबाजी या जानकारी के अभाव में यदि कोई महिला प्रसूता जिला अस्पताल आ जाए तो उसे चेकअप करने सलाह देने के लिए कोई महिला डॉक्टर नही है। जच्चा बच्चा व अन्य समस्याओं को लेकर महिलाओं व किशोरियों को दवाएं आदि जिला महिला अस्पताल में दिये जाने की व्यवस्था है। लेकिन जिला अस्पताल में बीमारी आदि का इलाज कराने के लिए महिला व पुरूष दोनो तरह के मरीज स्टेशन रोड पर स्थिति जिला अस्पताल में आते हैं। यहां पर एक भी महिला चिकित्सक नहीं हैं। दूसरी ओर महिलाओं का एक्सरे व अल्ट्रासाउंड करने के लिए एक भी महिला चिकित्सक व सहकर्मी की तैनाती नही है। इससे महिलाओं को काफी दिक्कत होती है कई बार महिलाओं को असहज होना पड़ता है।
जिला अस्पताल में एक महिला को प्रसव हुआ है उसने एक बच्ची को जन्म दिया है। महिला के गर्भवती होने पर उसके पेट दर्द आदि का कैसे इलाज हुआ इस बारे में जिला अस्पताल के इमरजेंसी ड्यूटी व सीएचसी अधीक्षक वजीरगंज से रिपोर्ट तलब की गई है। जिला अस्पताल में महिला चिकित्सक का पद नही है। - डॉ.अरूण लाल, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल गोंडा।