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Gonda News: 30 साल पुराने नजूल भूमि के विवाद में प्रशासन को मिली सफलता

Mon, 28 Sep 2026 11:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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ज्योति विद्या मंदिर से सामान निकालकर ले जाते लोग। स्रोत: सूचना विभाग 
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गोंडा। करीब 30 साल पुराने नजूल भूमि के विवाद में सोमवार को प्रशासन को बड़ी सफलता मिली। मुकदमे के वादी छावनी सरकार आनंदपुरी सिविल लाइंस निवासी दयानंद मिश्र ने दीवानी न्यायालय में शपथपत्र देकर आगे मुकदमे की पैरवी नहीं करने और कार्यवाही समाप्त करने का अनुरोध किया। उन्होंने विवादित सरकारी भूमि से अपना कब्जा भी हटा लिया।
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यह मामला सिविल लाइंस क्षेत्र में मंडलायुक्त कार्यालय और भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड से जुड़ा है। वर्ष 1997 में इस संबंध में सिविल न्यायालय में मुकदमा दायर हुआ था। करीब तीन दशक से मामला अदालत में लंबित रहा। मई 2026 में मंडलायुक्त का पद संभालने के बाद दुर्गा शक्ति नागपाल ने सरकारी जमीनों पर कब्जे से जुड़े पुराने मामलों की समीक्षा कराई। इसमें यह मामला भी सामने आया। प्रशासन की ओर से अभिलेखों और न्यायालय में चल रही कार्यवाही की समीक्षा कर सरकारी पक्ष मजबूती से रखने के निर्देश दिए गए। जांच में सामने आया कि विवादित भूमि पर ज्योति विद्या मंदिर नाम से विद्यालय संचालित हो रहा था। प्रशासन ने मौके पर जांच कराई तो वहां विद्यार्थी या शिक्षक नहीं मिले।

हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला
इसी मुकदमे की सुनवाई के दौरान जुलाई में मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल और सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान के बीच फोन पर हुई बातचीत को लेकर विवाद सामने आया था। जज ने इस संबंध में जिला जज को पत्र लिखा था। बाद में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अगस्त में फोन किए जाने से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मामले को आपराधिक अवमानना के स्तर पर विचार के लिए आगे बढ़ाने का आदेश दिया था।
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शासकीय भूमि का संरक्षण प्राथमिकता : मंडलायुक्त
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि शासकीय भूमि का संरक्षण और जनहित में उसका उपयोग प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि करीब 30 साल से लंबित मामले में संबंधित पक्ष ने अदालत में आगे पैरवी नहीं करने का अनुरोध किया है। मौके से कब्जा भी हटा लिया है। अब भूमि को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मंडल के सभी जिलों में सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में प्रभावी पैरवी कर निस्तारण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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