गोंडा। अंतर्जनपदीय तबादले की कार्य मुक्ति में धन उगाही के मामले में बेसिक शिक्षा के अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची है। अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को बीएसए दफ्तर में दस्तावेजों की जांच की और कर्मचारियों के बयान लिए।
बीएसए आफिस से 1085 शिक्षकों को कार्य मुक्त किया जाना था। देरी होने के कारण हंगामा हुआ और जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेट से रात में ही मंगलवार को जांच कराई। उसी दिन वजीरगंज के शिक्षक की ओर से कार्य मुक्ति के लिए धन उगाही की सूची वायरल करने से खंड शिक्षा अधिकारी ममता सिंह निलंबित कर दीं गईं। इसके बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच का आदेश दिया। एडीएम ने मामले की जांच किया।
अंतर जनपदीय तबादले में कार्य मुक्ति के लिए धन उगाही की सूची एक शिक्षक ने वायरल की। इस मामले की पूरी जांच पहले नहीं की गई और फोन पर ही सूची की पुष्टि करके कार्रवाई कर दी।
जिसमें बीईओ का निलंबन भी हो चुका है और अब जिलाधिकारी की ओर से अलग से भी जांच कराई जा रही है। ऐसे में कार्रवाई भी सवालों से घिर गई है। सूची में जिन शिक्षकों से पैसे लिए जाने का जिक्र है उनसे भी कोई जानकारी न करना चौंकाने वाला है। इसे लेकर खंड शिक्षा अधिकारियों का तनाव बढ़ गया है।
अंतर जनपदीय तबादले के लिए विभाग को दो दिन का समय ही मिला था। शासन ने एक व दो को कार्य मुक्ति के लिए समय तय कर रखा था, लेकिन स्थानंतरित शिक्षकों की सूची 31 जनवरी को मिली और यहीं से आपाधापी बढ़ गई। विभाग की मानें तो 1085 शिक्षकों को कार्य मुक्ति दो दिन में देना आसान काम नहीं था। एक फरवरी को बीआरसी पर फाइलों को जमा कराना और सारी जांच पूरी कराकर कार्यमुक्ति जारी कर किया गया। इसी वजह से देरी हुई और कई तरह के विवाद बढ़ गए।
बेसिक शिक्षा में चाहे ट्रांसफर के मामले में धन उगाही हो या फिर स्वेटर का मामला। प्रशासन तेजी से जांच पूरी करने में जुटा है। माना जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण को जिलाधिकारी ने गंभीरता से ले लिया है और कार्रवाई की तैयारी में हैं। फिलहाल जांच से वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास हो रहा है जिससे कोई बेवजह न फंसे। असल जिम्मेदार के खिलाफ ही कार्रवाई हो। जिलाधिकारी ने आदेश में शासन के जीरो टालरेंस को प्राथमिकता दिया है और स्पष्ट रिपोर्ट जांच समिति से मांगी है।