गोंडा। मसकनवा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे लाइन की मरम्मत के दौरान नौ ट्रैकमैन घायल होने की घटना को लेकर शुक्रवार को लखनऊ मंडल सहित पूरे पूर्वोत्तर रेलवे में कर्मचारियों ने आक्रोश जताया। ट्रैकमैनों ने हाथ में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। उधर कई यूनियन के नेताओं ने इस घटना पर पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक से लेकर चीफ इंजीनियर तक से मिलकर निष्पक्ष जांच व दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि बृहस्पतिवार को लखपतनगर-मसकनवा रेलखंड के बीच रेलवे लाइन की डिस्ट्रेसिंग करने के दौरान अचानक रेल पटरी छिटकने से नौ ट्रैकमैन घायल हो गए थे। जिसमें से चार को गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया था। अन्य घायलों का उपचार उपमंडलीय रेलवे अस्पताल गोंडा में चल रहा है। घटना को लेकर लखनऊ, इज्जतनगर व वाराणसी मंडल सहित पूर्वोत्तर रेलवे में कार्यरत ट्रैकमैनों में आक्रोश व्याप्त है।
शुक्रवार को गोंडा पीडब्ल्यूआई दफ्तर में सभी ट्रैकमैन एकत्र हो गए और अपने हाथ में काला पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। ड्यूटी के दौरान भी वह बांह पर काली पट्टी बांधे रहे। घटना को लेकर विभिन्न कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने भी नाराजगी व्यक्त की है। एनई रेलवे मेंस कांग्रेस के मंडल अध्यक्ष कुंवर विकास सिंह ने बताया कि एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वोत्तर रेलवे के चीफ इंजीनियर को ज्ञापन सौंपा है। इसमें जांच व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो और सेफ्टी पर ध्यान दिया जाए। इस मौके पर विनोद कुमार शर्मा, राजन चौधरी, विवेक सिंह व नागेंद्र श्रीवास्तव मौजूद रहे।
दूसरी तरफ ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री शिव गोपाल मिश्र ने घटना पर अफसोस व्यक्त किया। उन्होंने फेडरेशन व एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री कन्हैयालाल गुप्ता से फोन पर घटना की जानकारी ली। कहा कि घटना के बारे में रेलवे के उच्च अधिकारियों से वार्ता करें। महामंत्री ने शुक्रवार को गोरखपुर मुख्यालय में आपात बैठक बुलाई है। गोंडा से यूनियन के केंद्रीय संगठन मंत्री राम नगीना सहित कई पदाधिकारी गोरखपुर रवाना हो गए हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने भी पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक से मामले की जांच के साथ ही संबंधित अधिकारियों को दंडित करने की मांग की है। विनोद का कहना है कि इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से यह घटना हुई है। कर्मचारियों के ऊपर दबाव डाला जा रहा है। 30 कर्मचारियों का काम 10 से कराया जा रहा है। ये सेफ्टी के मानकों का खुला उल्लंघन है। पूर्वोत्तर रेलवे के पेंशनर्स यूनियन के अध्यक्ष जयप्रकाश द्विवेदी एवं मंत्री बलवीर श्रीवास्तव ने भी घटना पर अफसोस जाहिर किया है।
उपमंडलीय रेलवे गोंडा में खड़ी दुर्घटना सहायता यान ट्रेन पर कर्मचारियों ने सवाल उठाए हैं। कहा कि चार कर्मचारी ज्यादा गंभीर थे। उन्हें उपमंडलीय रेलवे अस्पताल गोंडा से लखनऊ रेफर किया गया। लेकिन उन्हें लखनऊ ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था काफी देर बाद हुई। किसी एंबुलेंस वाले के पास जीएसटी का बिल नहीं था तो किसी में अन्य कमियां थीं। यह मामला घंटों फंसा रहा। उधर घायल कर्मचारी तड़प रहे थे। जबकि गोंडा रेलवे यार्ड में दुर्घटना सहायता यान ट्रेन खड़ी रही। कर्मचारियों का कहना है कि एंबुलेंस की जगह दुर्घटना सहायता यान चलाकर गंभीर मरीजों को भेजा जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सवाल उठाया कि आखिर दुर्घटना सहायता यान का फिर काम ही क्या है?