झोलाछाप पर लगा था दुष्कर्म का आरोप
बीती 27 अक्तूबर को खरगूपुर के विशुनापुर कस्बे में एक झोलाछाप ने इलाज कराने आई महिला को नींद का इंजेक्शन देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। दुष्कर्म का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर विभिन्न संगठनों व स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया था। इसके बाद ही पुलिस ने झोलाछाप अजमल शेख पर मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा।
गलत इलाज से हुई थी मौत
बीते सितंबर माह में भी इटियाथोक इलाके में एक झोलाछाप के गलत इलाज के कारण एक 12 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। पूरे मनोगा बेलवा शुक्ल निवासी वेद शुक्ल (12) की मौत के बाद उसके पिता देवेंद्र कुमार शुक्ल ने स्थानीय थाने में तहरीर देकर झोलाछाप पर हत्या का आरोप लगाया था। बताया गया कि बच्चे की गंभीर हालत होने के बावजूद पैसों की लालच में उसे रेफर नहीं किया गया। ऐसे में समय पर उचित इलाज न मिलने से उनके लाल की जान चली गई।
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। जिले में सरकारी डॉक्टरों की कमी की वजह से ग्रामीण व कस्बा इलाकों में झोलाछाप का धंधा बेखौफ फलफूल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की माने तो जिले में करीब एक हजार छोलाछाप बिना डॉक्टरी की वैध डिग्री व योग्यता के ही इलाज के नाम पर क्लीनिक चलाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने में जुटे हैं। डीएम की सख्ती के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ऐसे झोलाछाप लोगों की दुकानें बंद कराने की कार्रवाई को लेकर उनकी कुंडली तैैयार करने में जुटा है।
सीएमओ कार्यालय से एक पत्र भेजकर सभी सीएचसी अधीक्षकों से उनके क्षेत्र में संचालित निजी क्लीनिक, हॉस्पिटल, डॉयग्नोस्टिक सेंटर व पैथालॉजी के साथ झोलाछाप लोगों की सूचना मांगी गई है। विभागीय स्तर पर रोकथाम कार्रवाई न होने के कारण हर गांव व कस्बा इलाकों में बेहतर इलाज के दावे के साथ झोलाछाप अपनी दुकानें सजा कर चलाने में जुटे हैं। खुद को डॉक्टर बताने वाले यहां मौजूद लोग बिना डॉक्टरी की किसी वैध डिग्री के ही सर्दी, बुखार, खांसी, टीवी, दमा, काली खांसी, मोतियाबिंद, कान के रोग, खाज, खुजली, दाद, एक्जिमा की दवा देने से लेकर सिजेरियन प्रसव तक कराने का काम बिना किसी खौफ करते हैं।
सेहत से खिलवाड़ करने वाले इन झोलाछाप के कारण अब तक कई लोगों की जान तक जा चुकी है। इसके बावजूद इन पर शिकंजा कसने को सख्ती नहीं बरती जाती। बीच बीच में संचालित कार्रवाई के दौरान धंधेबाज अपनी दुकान का शटर गिरा कर मामला ठंडा हो जाने पर फिर से खोल देते हैं। डीएम की सख्ती के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की ओर सीएचसी स्तर पर सर्वे करवा कर ऐसे झोलाछाप को चिह्नित कर उनकी सूची तैयार कराई जा रही है। पांच सीएचसी अधीक्षकों ने तो अपने क्षेत्र में संचालित झोलाछाप को चिह्नित कर उनकी सूची भी सीएमओ कार्यालय को सौंप दी है।
बिना जरूरी डिग्री व पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकता है। निजी क्लीनिक, पैथालॉजी व डायग्नोसिस्टक सेंटर संचालकों की सूूची तलब की गई है। अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. आदित्य वर्मा, एसीएमओ