चकरसूल में हुए अवैध खनन मामले की जांच का असर अब धीरे-धीरे दिखने लगा है। शुक्रवार को इस मामले में जहां खनन माफिया हाफिज की करीब दस करोड़ की अचल संपत्ति को कुर्क किया गया तो वहीं शनिवार को जिलाधिकारी ने इस मामले में नवाबगंज में तैनात रहे तत्कालीन एसओ और तरबगंज के तहसीलदार को प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी।
साथ ही डीजीपी को पत्र भेज इस बात की संस्तुति किया है कि इन्हें किसी थाने का चार्ज न दिया जाए। चकरसूल में हुए अवैध खनन के मामले में शनिवार को जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने सख्त कदम उठाते हुए तत्कालीन एसओ विजयेन्द्र कुमार और दिनेश चन्द्र को बैड इंट्री दे दी।
नवाबगंज के तत्कालीन एसओ विजयेन्द्र कुमार वर्तमान में जनपद बस्ती में तैनात हैं। प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ डीएम ने डीजीपी को पत्र भेज इस बात की संस्तुति की है कि विजयेंद्र सिंह को कभी किसी चौकी या थाने का प्रभार न दिया जाए।
वहीं तहसीलदार दिनेश चन्द्र की तैनाती भदोही जनपद में है। प्रतिकूल प्रविष्टि में जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने एसडीएम तरबगंज की उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया है, जिसमें उनके निरीक्षण के दौरान गाटा संख्या 238, 241 व 242 पर रात के अंधेरे में खनन होते पाया गया।
बावजूद इसके नवाबगंज थाने के एसओ व तहसीलदार ने मामले में न तो किसी प्रकार की कोई कार्रवाई की न ही इस गांव का निरीक्षण कर खनन माफिया पर कोई अंकुश ही लगाया। जबकि इसी प्रकरण में एसडीएम की ओर से नसीमुन्निशा सहित 9 अन्य लोगों के खिलाफ 617/2016 के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
जानकारों की मानें तो अवैध खनन मामले की एनजीटी में चल रही जांच का तो यह प्रारम्भिक असर है, अगली कार्रवाई तो उन बड़े अधिकारियों व सफेदपोश नेताओं पर होनी है, जो इस गोरखधंधे को बढ़ावा देते आ रहे हैं।