एनएचएआई ने संजय सेतु की मरम्मत के लिए 10 फरवरी से पुल बंद करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे डीएम प्रियंका निरंजन ने अस्वीकार कर दिया था। डीएम ने कहा था कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के पुल बंद नहीं किया जा सकता। इसके बाद पीपे का पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया।
इसी मुद्दे को लेकर करनैलगंज के विधायक अजय सिंह, कटरा के विधायक बावन सिंह, तरबगंज के विधायक प्रेमनरायन पांडेय, मेहनौन के विधायक विनय कुमार द्विवेदी और गौरा के विधायक प्रभात वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उनसे वैकल्पिक पुल निर्माण की मांग उठाई। इसके बाद प्रक्रिया में तेजी आई।
बहराइच लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन अमर सिंह ने बताया कि टीम के साथ संजय सेतु का स्थलीय निरीक्षण किया गया है। एक ही साइड से आने-जाने के लिए दो लेन का पीपे का पुल बनाने का प्रस्ताव है। सर्वे पूरा होने के बाद खर्च का आकलन कर एस्टीमेट एनएचएआई को भेजा जाएगा। पैसा मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
प्रशासन का दावा-जल्द होगा समाधान
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि संजय सेतु की मरम्मत से पहले पीपे के पुल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं, ताकि आमजन को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो। जल्द ही समाधान सामने आएगा।
बिना वैकल्पिक व्यवस्था बढ़ जाती मुश्किल
संजय सेतु बंद होने पर गोंडा के साथ बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर के यात्रियों की परेशानी होती। सबसे अधिक दिक्कत लखनऊ इलाज के लिए जाने वाले मरीजों को होती। मंडल मुख्यालय पर ट्रॉमा सेंटर न होने से प्रतिदिन 30-40 गंभीर मरीज लखनऊ रेफर किए जाते हैं, जिनमें हेड इंजरी और हृदय रोगी शामिल होते हैं। वर्तमान मार्ग से लखनऊ की दूरी करीब 120 किमी है, जो एंबुलेंस से दो से ढाई घंटे में तय हो जाती है। अयोध्या या बहराइच के रास्ते जाने पर यही सफर तीन से चार घंटे का हो जाता, जो गंभीर मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।
संजय सेतु के जॉइंटर में फिर आई बड़ी दरार
जरवलरोड (बहराइच) । संजय सेतु के जॉइंटर में एक बार फिर से दरार बढ़ गई है। इस बार गैपिंग ने बड़े गड्ढे का रूप ले लिया है, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। लगभग बीच पुल के जॉइंटर में लगा लोहे का रॉड और सरिया उखड़ गया है। गढ्ढा बड़ा होने से नीचे नदी भी स्पष्ट दिख रही है।
संजय सेतु पर कई जगह जॉइंटर में छोटे-छोटे गड्ढे बन गए हैं। एक जगह तो गड्ढा बड़ा हो गया है। जॉइंटर में गैपिंग ज्यादा होने से छोटे के साथ ही बड़े वाहनों के टायरों के फटने की आशंका बनी हुई है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
क्षमता से 40 गुना अधिक भार उठा रहा
संजय सेतु का शिलान्यास 1981 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने किया था। यह पुल करीब 45 वर्ष पुराना है। पुराना होने के साथ ही सेतु अपनी क्षमता से लगभग 40 गुना अधिक वाहनों का भार उठा रहा है। बिना मरम्मत के अब इस पर भारी वाहनों का आवागमन जोखिम भरा है।
प्रतिदिन गुजरते हैं 30 से 35 हजार वाहन
संजय सेतु से प्रतिदिन 30 से 35 हजार वाहन गुजरते हैं। ऐसे में आए दिन कुछ न कुछ खराबी बनी रहती है, जिसके कारण कई किलोमीटर जाम लगा रहता है। इससे मरीज से लेकर स्कूली बच्चे परेशान रहते हैं। संजय सेतु देवीपाटन मंडल के चार जिलों गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है।