फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खतरे में बच्चों की जान, अफसर नहीं दे रहे ध्यान

विज्ञापन
विज्ञापन
गोंडा। जिले में केवल जमालखानी गांव में स्थित प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल की बिल्डिंगें ही ऐसी नहीं हैं, जिनका निर्माण एचटी लाइन के नीचे हुआ है। बल्कि कई ऐसे स्कूल हैं, जहां बच्चों को हथेली पर अपनी जान रखकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। अगर यह बेसिक शिक्षा विभाग का लचर प्रबंधन नहीं तो और क्या है, जहां बच्चों को हर वक्त खेलते, कूदते और पढ़ते वक्त अपनी जान का भय सताता रहता है। यह जानते हुए कि एचटी लाइन के नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण कराना गैर कानूनी है, फिर भी शिक्षा विभाग एक के बाद एक ऐसे विद्यालयों का निर्माण कराता चला जा रहा है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को तो हर वक्त जान का भय बना रहता है, साथ में उनके अभिभावक से लेकर स्कूल में पढ़ाने आने वाले अध्यापक भी इससे हर वक्त खौफजदा रहते हैं। पेश है एक रिपोर्ट-
विज्ञापन



केस-एक
स्थान : प्राथमिक विद्यालय जमालखानी
जमालखानी गांव में जिस जगह पर प्राथमिक स्कूल बना हुआ है, ठीक उसी के ऊपर से होकर बिजली की हाईटेंशन लाइन का तार गया है। बताया जाता है कि इस विद्यालय का निर्माण शिक्षा विभाग ने वर्ष 1998 में यह जानते हुए भी यहां करा दिया था कि जिस जगह पर स्कूल का निर्माण होना है, वहां से होकर बिजली की हाईटेंशन लाइन गई हुई है। स्कूल में 170 बच्चे पंजीकृत हैं, जो रोज इसी एचटी लाइन के नीचे खेलते-कूदते और पढ़ते हैं। इससे हर वक्त उनकी जान पर खतरा मंडराया करता है, लेकिन इसके बाद भी शिक्षा विभाग खामोश है।


केस-दो
जूनियर हाईस्कूल जमालखानी
वर्ष 2008-09 में जूनियर हाईस्कूल जमालखानी का भवन भी ठीक एचटी लाइन के नीचे बनवाया गया है। इस विद्यालय में कुल 112 बच्चे पंजीकृत हैं, जो दिन भर स्कूल परिसर से होकर गुजरी एचटी लाइन के नीचे खेलते, कूदते व पढ़ते हैं। इसके तारों के नीचे किसी प्रकार की कोई गार्डिंग (घेराचक्र) तक नहीं की गई है।
विज्ञापन



इनसेट
अकेले तरबगंज में एचटी लाइन के नीचे चल रहे 12 स्कूल
तरबगंज क्षेत्र में करीब 12 स्कूल ऐसे हैं, जिनका संचालन एचटी लाइन के ठीक नीचे हो रहा है। इसमें पैसनपुरवा, गंगरौली, डवरी, गढ़ी, जमालखानी, ढोंढेपुर, सोनबसिया व पिपरीरोहुआ गांव प्रमुख हैं। जबकि इटियाथोक इलाके के डवरी गांव में संचालित सरकारी स्कूल की बिल्डिंग भी एचटी लाइन के ठीक नीचे बनी है। इसी तरह जिले के हर विकासखंड में आधा दर्जन स्कूल ऐसे हैं, जो एचटी लाइन के नीचे संचालित हैं। वहीं इनसे दोगुनी संख्या में प्राइवेट स्कूल एचटी लाइन के नीचे चल रहे हैं।

इनसेट
गैर कानूनी है एचटी लाइन के नीचे निर्माण
एचटी यानि हाईटेंशन लाइन के नीचे किसी भी तरह का निर्माण गैर कानूनी है। फिर चाहे वह लाइन 11 केवी (किलोवाट) की हो या फिर 33 केवी, 132 केवी व 220 केवी की।



कोट
एचटी लाइन प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूलों के परिसर से होकर गई है। इसके लिए कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर सूचित भी किया गया है। यहां तक कि प्रधान से भी इस संबंध में कई बार इस लाइन को हटवाने के लिए कहा गया है। प्रधान लादूराम से बीते दिनों ही इस मुद्दे पर उनकी बात हुई थी तो उन्होंने जिलाधिकारी के समक्ष इस प्रकरण को उठाने की बात भी कही थी। चूंकि बिल्डिंग मेरी तैनाती से पहले की बनी है। इसलिए इस बारे में मैं ज्यादा नहीं बता सकता।
-अमित कुमार सिंह, प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय जमालखानी


कोट
नियम यही है कि कोई भी निर्माण एचटी लाइन के नीचे तब तक न किया जाए, जब तक कि एचटी लाइन कहीं और शिफ्ट न हो जाए। जिले में कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जो एचटी लाइन के नीचे चल रहे हैं। ऐसे स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा जाएगा। क्योंकि एचटी लाइन के नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण गैरकानूनी है।
विज्ञापन

-एके चौरसिया, एक्सईएन पावर कारपोरेशन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें