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अवैध निजी अस्पतालों पर कसा प्रशासन का शिकंजा

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गोंडा (ब्यूरो)। जिले में चल रहे अवैध निजी अस्पतालों पर प्रशासन का शिकंजा अब धीरे-धीरे कसने लगा है। मामले की जांच में जुटी दो मजिस्ट्रेटों की टीम ने सीएमओ से जिले में संचालित हो रहे वैध नर्सिंग होम की सूची तलब करते हुए रजिस्ट्रेशन के लिए लंबित दो नर्सिंग होम को अलग-अलग नोटिस भेजे हैं। जिसमें एक नर्सिंग होम के संचालक को तीन दिन में औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है। दूसरे नर्सिंग होम के संचालक को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं किस कदर पटरी से उतरी हैं, इसका समाचार ‘अमर उजाला’ ने 13 जनवरी के अंक में ‘यहां तो हर गली में चल रहे अवैध नर्सिंग होम’ शीर्षक से प्रकाशित किया था। जिसके बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने न सिर्फ मामले में जांच बैठा दी। बल्कि खबर छपने के एक दिन बाद ही उस नर्सिंग होम को भी सील करा दिया। जो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की आंख में धूल झोंकते हुए जिला अस्पताल के सामने संचालित हो रहा था। यही नहीं अवैध नर्सिंग होम पर लगाम लगाने के लिए जिलाधिकारी स्तर से गठित दो मजिस्ट्रेटों की टीम भी पड़ताल करने में जुटी है। इसके लिए बुधवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचे अतिरिक्त मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार ने सबसे पहले सीएमओ डॉ. जेपी गुप्त से जिले में संचालित ऐसे नर्सिंग होम की सूची तलब की, जो स्वास्थ्य विभाग में पहले से रजिस्टर्ड हैं। जबकि दो नर्सिंग होम, जिनके रजिस्ट्रेशन का आवेदन पत्र स्वास्थ्य विभाग में पिछले कई महीनों से लंबित हैं, उन्हें नोटिस भेजकर एक नर्सिंग होम के संचालक से जवाब मांगा है तो वहीं दूसरे नर्सिंग होम के संचालक को रजिस्ट्रेशन की औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है। उधर, जिला प्रशासन की तरफ से अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई को लेकर संचालकों में खलबली मची है और जहां-जहां भी अवैध नर्सिंग होम संचालित हो रहे थे। उन सभी के संचालकों ने अपना बोरिया-बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है।
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