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अब भी पानी से घिरे 55 मजरे

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गोंडा। नदियों का जलस्तर भले ही घट रहा हो, लेकिन अभी खतरा अभी बरकरार है। घाघरा व सरयू अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं बाढ़ के पानी से घिरे 55 मजरों की 10 हजार आबादी को राहत का इंतजार है। जलस्तर घटने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक शुक्रवार को घाघरा का जलस्तर 106.51 मीटर रहा। घाघरा एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 44 सेमी ऊपर बह रही थी। इसी तरह सरयू का जलस्तर शुक्रवार को 92.98 मीटर रहा। अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान से 25 सेमी ऊपर बह रही थी। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी तेल व तिरपाल का वितरण करना शुरू किया है, लेकिन वह मौजूदा जरूरतमंदों के सामने ऊंट के मुंह में जीरा है। तरबगंज व करनैलगंज तहसील क्षेत्र में प्रशासन ने कुल 192 नावें लगा रखी हैं। करनैलगंज ब्लॉक के ग्राम चंदापुर किटौली, तरबगंज ब्लॉक के ग्राम जैतपुर, बेउंदा, इंद्रपुर, सेमरा के अलावा नवाबगंज के ग्राम दुर्गागंज माझा, चौखड़िया, तुलसीपुर माझा, साखीपुर , गोकुला दुल्लापुर समेत 55 से अधिक मजरे बाढ़ के पानी से लगातार एक माह से घिरे हैं। अब इन लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट गहराता जा रहा है। लोगों को अब प्रशासन से राहत का आसरा है। गोकुला गांव के लाल साहब का कहना है कि गांव में लोगों को मिट्टी तेल की दरकार है। तुलसीपुर के गंगा प्रसाद का कहना है कि गांव में काफी दिन से जलभराव के चलते लोगों के रोजगार के अवसर घट गए हैं। ऐसे में गरीबों के यहां अनाज खाने को नहीं है। प्रशासन को अतिरिक्त खाद्य सामग्री देनी चाहिए।
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इनसेट
‘ घाघरा व सरयू नदी का जलस्तर घट रहा है। खतरे की कोई बात नहीं है। बाढ़ के पानी से जो पुरवे घिरे हैं, वहां पर्याप्त नावें लगी हैं। जरूरत मंदों को राहत सामग्री देने के लिए सभी एसडीएम को निर्देशित किया गया है’।
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-उदय शंकर उपाध्याय, बाढ़ आपदा के नोडल अधिकारी/ मुख्य राजस्व अधिकारी।
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