गोंडा। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर व संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री लगाकर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 17 प्रशिक्षु शिक्षकों के खिलाफ मंगलवार देर रात कोतवाली देहात में मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ ही इन सभी का प्रशिक्षण निरस्त कर दिया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान दर्जीकुंआ बीटीसी व विशिष्ट बीटीसी के जरिए आवेदन आमंत्रित कर अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित करता है। उसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में इन्हें तैनाती दी जाती है। तत्कालीन डायट प्राचार्य अजय कुमार द्विवेदी ने बीटीसी व विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के प्रपत्रों का सत्यापन कराया तो पता चला कि फर्जी शैक्षिक डिग्री लगाई गईं हैं। इस संबंध में ‘अमर उजाला’ ने 15 जून 2012 के अंक में ‘फर्जी निकली 29 प्रशिक्षुओं की डिग्री’ शीर्षक से समाचार भी प्रकाशित किया था। इसके बाद कार्रवाई शुरू हुई। उस दौरान 11 प्रशिक्षुओं के शैक्षिक प्रपत्र फर्जी पाए जाने पर जून 2012 में कोतवाली देहात में मामला दर्ज कराया गया था। डायट प्राचार्य मनोहर लाल के मुताबिक प्रशिक्षुओं के अभिलेखों का सत्यापन संबंधित शैक्षिक संस्थानों से कराया गया। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी ने बलरामपुर के प्रवीण, संदीप, मनीष, अतर सिंह वर्मा के पूर्व मध्यमा तथा उत्तर मध्यमा के फर्जी अंकपत्र की पुष्टि की है। वहीं, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर ने पवन कुमार व रामचन्द्र शुक्ल के स्नातक के अंकपत्रों को फर्जी बताया है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने विजय कुमार, उदयभान वर्मा, उमापति तिवारी, ललित कुमार, सावित्री देवी, श्रीप्रकाश, कुंवर सिंह, चन्द्रेश कुमार, रविन्द्र कुमार मिश्रा, तितिक्षा सिंह एवं अनीता देवी के भी पूर्व मध्यमा के अंकपत्र फर्जी होने की रिपोर्ट दी। डायट प्राचार्य की तहरीर पर कोतवाली देहात पुलिस ने सभी 17 प्रशिक्षु शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। कोतवाली देहात के प्रभारी निरीक्षक शशिकंात यादव का कहना है कि बलरामपुर के छह व गोंडा के 11 प्रशिक्षु शिक्षकों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नौकरी लेने के आरोप में मामला दर्ज करके जांच की जा रही है।