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गांधी आश्रम को 89 लाख की दरकार

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गोंडा। ‘मुझे इसमें जरा भी संदेह नहीं कि हमारे देश में जहां लाखों आदमी बेकार पड़े है, लोग ईमानदारी के साथ अपनी रोजी रोटी कमा सकें, इसके लिए उनके हाथ पैरों को किसी न किसी काम में लगाए रखना जरूरी है। खादी और कुटीर उद्योग उनके लिए आवश्यक है। मेरे लिए यह बात सूर्य प्रकाश की भांति स्पष्ट है कि इन उद्योगों की आज सख्त जरूरत है’। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ये पंक्तियां उनके खादी प्रेम का प्रतीक हैं। खादी के माध्यम से भले ही बापू ने लोगों को बेकारी से बचाने की मुहिम का सपना संजोया हो, लेकिन सरकार की कार्यशैली इन पर भारी पड़ रही है। खादी उद्योग से जुड़े गांधी आश्रम को उपभोक्ताओं को छूट के एवज में सरकार से 89 लाख रुपये की दरकार है। यह बकायेदारी वर्ष 1991 से चल रही है। स्वदेशी, स्वरोजगार व स्वावलंबन के संकल्प के साथ जिले में खादी ग्रामोद्योग विभाग वर्तमान समय में दो योजनाएं चला रहा है। 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता के लिए मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत वर्तमान सत्र में 73 फाइलें स्वीकृत करके बैंकों को भेजी गयी है, जिसमें से 36 को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं 25 लाख रुपये के प्रोजेक्ट की स्थापना के लिए संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 16 उद्योगों का लक्ष्य मिला है, जिसमें कार्यवाही की जा रही है। खादी उत्पादों की बिक्री के लिए शहर में तीन शो रूम स्थापित हैं। यहां पर खादी के चादर, गमछा, कंबल, रजाई, गददा सहित सभी तरह के वस्त्र उपलब्ध हैं। गांधी आश्रम की सेहत सुधारने के लिए सरकार कोई ठोस प्रयास नहीं कर रही है। सरकार द्वारा खादी के वस्त्रों की बिक्री तेज करने को लेकर उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए 30 प्रतिशत छूट का तो ऐलान कर दिया जाता है, लेकिन उसके एवज में बाद में गांधी आश्रम को 30 प्रतिशत का भुगतान नहीं किया जाता, जिससे गांधी आश्रम की आर्थिक स्थिति डावांडेाल होती जा रही है। उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट का 20 प्रतिशत केंद्र सरकार व 10 प्रतिशत राज्य सरकार बाद में गांधी आश्रम को देगी। जिले में प्रदेश सरकार पर छूट के एवज में गांधी आश्रम की 1991 से लेकर मार्च 2012 तक 64 लाख रुपये बकाया है। जबकि केंद्र सरकार का करीब 25 लाख रुपये बकाया है। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एसके शर्मा का कहना है कि योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
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कैसे लगाएं ग्रामोद्योग
ग्रामीण क्षेत्रों के परंपरागत कौशल को बढ़ावा देने के लिए शिक्षित बेरोजगार युवकों को प्रशिक्षित करके उन्हें अपने ही गांव में मनपंसद उद्योग स्थापित कराने में उप्र खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड आर्थिक सहायता प्रदान करता है। ग्रामीण क्षेत्र में 20 हजार से अधिक आबादी पर स्थापित उद्योग को ग्रामोद्योग की श्रेणी में रखा जाएगा।
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ग्रामोद्योग में अनुमन्य उद्योग धंधे
खनिज आधारित, वनाधारित, कृषि और खाद्य उद्योग, रसायन आधारित, इंजीनियरिंग और गैर पंपरागत ऊर्जा, वस्त्रोद्योग, सेवा उद्योग आदि।

मिलेगी छूट
खादी के वस्त्रों के प्रति लोगों को जोड़ने के लिए तीन अक्तूबर से आगे के 108 दिनों तक उपभोक्ताओं को 30 प्रतिशत तक छूट मिलेगी।

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