शहर में शौचालय निर्माण अधूरा छोड़ भागी संस्था
गोंडा। स्वच्छता अभियान से शहर के कई वार्डों में सार्वजनिक शौचालय के निर्माण की कवायद फंस गई है। निर्माण करा रही संस्था आधा अधूरा निर्माण छोड़कर लापता हो गई है।
इससे शौचालयों का निर्माण रुक गया है और स्वच्छता अभियान को झटका लगा है। अधूरे निर्माण कार्यों की नगर पालिका परिषद ने जांच कराई तो निर्माण की गुणवत्ता में कमी मिली।
इसके अलावा संस्था की ओर से कार्य में रुचि नही लिया जा रहा था। नपाप ने संस्था के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दिया है। नोटिस जारी कर पूरी रिपोर्ट मांगी है।
जिला प्रशासन स्वच्छ भारत मिशन के तहत 95 प्रतिशत शौचालयों के निर्माण पर बधाइयां दे रहा है। वहीं प्रशासन के नाक के नीचे ही बने शौचालय अपने पूर्ण निर्माण को तरस रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर में वार्डों में शौचालय बनाये गए जो अभी तक पूरा नही हुआ हालात यह है कि अंदर लगे सामान भी अस्त व्यस्त हो चुके हैं। 27 वार्डों में 35 शौचालयों का निर्माण होना था।
34 लाख 30 हजार की लागत से होने वाले निर्माण का कार्य लखनऊ की एक संस्था को शासन से ही कार्य मिला था। संस्था को सार्वजनिक स्थानों पर एक पुरुष व एक महिला शौचालय का निर्माण करना था।
इससे शहर में आने वाले लोगों को शौचालय की सुविधा मिल जाती। लेकिन संस्था बीच में ही काम छोड़कर फरार हो गई।
शौचालय नगर के माकार्तिगंज का है जहां बने पुरुष व महिलाओं के लिए शौचालय बदहाली की मार झेल रहा है। लोगों का कहना है कि यह कभी चालू ही नही हुआ यह बन के तो तैयार हो गया लेकिन अभी तक इसका संचालन ही नहीं हुआ।
सरकार की स्वच्छता पर मंशा जगजाहिर है। प्रधानमंत्री ने खुद स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया लेकिन आज जहां सरकार अपने कामों का हिसाब दे रही है वहीं जिला मुख्यालय पर शौचालयों की स्थिति ऐसी है।
शिव कुमार स्थानीय का कहना है कि एक लाख में यह शौचालय का निर्माण कराया गया जो अब खुद गंदगी का अड्डा बन चुका है। इसी तरह बड़गांव चौराहे स्थित शौचालय की भी यही स्थिति पाई गई वहाँ भी शौचालय जिसकी टंकी गिर चुकी है पाइप उखड़ गये है।
यह शौचालय बनाने की कंपनी सीधे शासन द्वारा नामित थी। गुणवत्ता के दृष्टिगत रखते हुए कंपनी का काम रोक दिया गया है। उसके खिलाफ हम जो भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
विकास सेन, ईओ नगर पालिका