सीवर लाइन पड़ी नहीं, 300 बेड का अस्पताल भी अधूरा
गोंडा। प्रदेश सरकार शुक्रवार को अपना बजट पेश करने जा रही है। जिससे गोंडा के लोगों को काफी उम्मीदे हैं। हालांकि लोगों की उम्मीदों को प्रदेश सरकार किस हद तक पूरा करती है तो यह वक्त बताएगा।
लेकिन जहां तक बात शहर की दुश्वारियों की है तो उसमें गोंडा के माथे पर लगा गंदगी का दाग इस वजह से भी है कि यहां जिस सीवर लाइन की डिमांड एक अरसे से रही है, उसे पूर्ववर्ती प्रदेश सरकार पांच साल सत्ता में रहते हुए भी पूरा नहीं कर पाई।
जबकि मौजूदा वक्त केंद्र व प्रदेश में सत्ता होने के बावजूद इसका प्रोजेक्ट किस विभाग के किस कोने में धूल फांक रहा है, इस तक का कोई पता नहीं है। वहीं 10 साल से लेखपालों के लिए बन रही ट्रेनिंग सेंटर की बिल्डिंग, जिला, महिला अस्पताल के उच्चीकरण की कार्रवाई भी जहां के तहां अटकी पड़ी है।
मेडिकल कॉलेज बने तो आसान होगा इलाज
दो साल पहले हुई गलती की सजा गोंडा आज भी भुगत रहा है। काश...जिला अस्पताल में निर्माणधीन 300 बेड अस्पताल की बिल्डिंग अगर दो साल पहले पूरी हो गई होती तो बहराइच गया मेडिकल कालेज आज गोंडा में बन रहा होता।
हालांकि आज नहीं तो 6 महीने बाद आखिरी स्टेज में चल रहा 300 बेड अस्पताल का काम पूरा होने की उम्मीद है। जिसके लिए अभी से यहां के लोग मेडिकल कॉलेज की मांग करने लगे हैं। लोगों को उम्मीद है कि दो साल पहले मंडल मुख्यालय गोंडा पर बनने वाला मेडिकल कालेज बहराइच को दे दिया गया, पर अबकी बार ऐसा नहीं होगा।
अगर प्रदेश की योगी सरकार जनपदवासियों की इस उम्मीद को पूरा करती है तो यह उनके लिए एक बड़ी सौगात होगी। इससे न सिर्फ बीमार लोगों को आसानी से इलाज मुहैया हो सकेगा, बल्कि सैकड़ों की संख्या में लोगों के रोजगार के नए आयाम भी खुल जाएंगे।
गोंडा की मजबूरी है सीवर लाइन जरूरी है
गोंडा शहर की सबसे बड़ी समस्या चोक नाले, खुले नाले में बहता मैला और जहां-तहां पसरी पड़ी गंदगी है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि साढ़े तीन लाख आबादी वाले गोंडा शहर में आज तक कोई सीवर लाइन नहीं पड़ी।
जबकि सीवर लाइन डालने के प्रोजेक्ट पर केंद्र व प्रदेश सरकार मिलकर लाखो रुपए अबतक खर्च कर चुकी हैं। पांच साल पहले केंद्र सरकार की योजना जेएनयूआरएम में इसकी डीपीआर तैयार की गई। जिसमें इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 350 करोड़ रुपए थी। बाद में इसकी डीपीआर कई बार रिवाइज हुई।
जिसमें इसका इस्टीमेट घटकर 279 करोड़ हो गया। कुछ साल यह प्रोजेक्ट भारत सरकार में फंसा रहा तो बाद में इसे सूबे की सत्ता में काबिज अखिलेश सरकार ने मुद्दा बना लिया और गोंडा के लोगों को इसका लॉलीपाप भी दे दिया। यही नहीं केंद्र की मोदी सरकार के एक अहम मंत्रालय में इसका प्रोजेक्ट पिछले साल भर से कहां फंसा है।
यह भी कोई बताने को तैयार नहीं है। सीवर लाइन अगर गोंडा शहर में पड़ जाती है तो इससे न सिर्फ चोक नालों, नालियों व मैले की समस्या खत्म हो जाएगी। बल्कि गोंडा गंदगी के दाग से भी मुक्त हो जाएगा।
फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए जरूरी है बजट
प्रदेश सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में जिले को दाल के लिए चुना है। जिले में दाल का उत्पादन होता है। अधिक उत्पादन होने के साथ उससे उपयोग की कई संभावनाएं हैं। 16 फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार ने अगर इस ओर ध्यान दिया तो जिले को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है।
जिले में दाल उत्पादन को देखते हुए फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाए जाने को लेकर सरकार का ध्यान जा सकता है। इसके लिए बजट मिला तो न इससे सिर्फ रोजगार बढ़ेगा बल्कि दाल उत्पादक किसानों को उनके उपज का वाजिब मूल्य भी मिल सकेगा। जिले में मटर, अरहर, मसूर व उरद आदि का अच्छा उत्पादन होता है। इस खेती से जिले के हजारों किसान जुड़े हैं।
इंजीनियरिंग व कृषि महाविद्यालय के निर्माण से बनेगी बात
गोंडा। शिक्षा के क्षेत्र में जिले में उच्च शिक्षण संस्थाओं का अभाव है। खासकर तकनीकी शिक्षा के लिए यहां के छात्र छात्राओं को बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। मंडल मुख्यालय पर एक इंजीनियरिंग कालेज का निर्माण चल रहा है मगर इसकी प्रगति काफी धीमी है।
इसी तरह से करनैलगंज में बनने वाला कृषि महाविद्यालय भी अधर में है। अगर इन दोनो शिक्षण संस्थाओं का निर्माण समय से पूरा हो जाए तो यहां के बच्चों को दूसरे शहरों की तरफ नही जाना पड़ेगा।