सीएम की सख्ती के बाद 27 करोड़ का टेंडर निरस्त
गोंडा। भ्रष्टाचार के आकंठ में डूब चुके पीडब्ल्यूडी विभाग में एक बड़े गोलमाल का मामला सामने आया है। यहां 27 करोड़ से बनने वाली 12 किलोमीटर सड़क का एक काम एक चहेती फर्म को देने के लिए विभाग के ही अभियंताओं ने शासनादेश की ऐसी धज्जियां उड़ाईं कि मामले की गूंज मुख्यमंत्री कार्यालय तक जा पहुंची।
जिसके बाद आनन-फानन में पीडब्लूडी के लोगों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए टेंडर तो निरस्त कर दिया। लेकिन इसके दोषी लोग अभी भी कार्रवाई से दूर हैं। जिसकी शिकायत बनकसिया शिवरतन सिंह निवासी धरणीधर सिंह ने कमिश्नर से करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
गौरतलब है कि उतरौला-फैजाबाद-इलाहाबाद (यूएफए) रोड के 12 किलोमीटर सड़क के लिए पीडब्लूडी ने दो महीने पहले टेंडर निकाला था। इस रोड का काम 27 करोड़ 48 लाख 93 हजार रुपए की लागत से होना था।
जिसके लिए 339.57 लाख, 305.58 लाख, 240.25 लाख, 274.04 लाख रुपए से होने वाले चार अलग-अलग कार्यों को जोड़ते हुए एक साथ एक टेंडर निकाला गया। शासनादेश के मुताबिक सड़क मरम्मत/नवीनीकरण के होने वाले इस काम के लिए वही फर्म टेंडर में क्वालीफाई कर सकती थी, जिसके पास काम की कुल लागत यानि की 27 करोड़ के सापेक्ष 9 करोड़ रुपये का अनुभव प्रमाणपत्र हो।
बावजूद इसके पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने शासनादेश की अनदेखी करते हुए इसका काम अपनी एक चहेती फर्म को दे दिया। जिसके अनुभव प्रमाणपत्र में खामी थी। मामले की शिकायत बनकसिया शिवरतन सिंह निवासी धरणीधर सिंह ने पहले तो अधीक्षण अभियंता से की, लेकिन जब उनकी ओर से मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई तो उन्होंने इसकी शिकायत प्रमुख अभियंता, प्रमुख सचिव से भी की।
लेकिन यहां तक शिकायत पहुंचने के बाद भी इस मामले में किसी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद धरणीधर सिंह इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गए। जहां टेंडर नोटिस 4711/98 की जैसे ही कार्यालय से पड़ताल की जाने लगी तो आनन-फानन में पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदारों ने 27 करोड़ रुपये से होने वाले काम का टेंडर तो निरस्त कर दिया।
लेकिन पूरे मामले के दोषी लोग अभी भी कार्रवाई से बचे हुए हैं। जिसकी शिकायत धरणीधर सिंह ने गुरुवार को आयुक्त देवीपाटन मंडल से करते हुए इसके दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मैंने पीडब्ल्यूडी में चल रहे इस गड़बड़झाले की शिकायत विभाग के हर एक जिम्मेदार से की थी। लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री के यहां शिकायत के बाद खुद की गर्दन बचाने के लिए विभाग ने टेंडर निरस्त किया।
-धरणीधर सिंह, शिकायतकर्ता
मैं मानता हूं कि अनुभव प्रमाणपत्र बनाने में गलती हुई थी। कंप्यूटर मिस्टेक के चलते एक के बजाए दो कामों को जोड़कर 10 करोड़ रुपये का अनुभव प्रमाणपत्र बना था। जिसका जवाब उन्होंने दे दिया है। टेंडर निरस्त हो चुका है। नए सिरे से फिर से टेंडर कराया जाएगा।
डीके कुरील, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी
12 किलोमीटर उतरौला-फैजाबाद-इलाहाबाद (यूएफए) रोड का काम किलोमीटर 46 से किलोमीटर 58 तक कराए जाने के लिए टेंडर हुआ था। जिसे कुछ त्रुटियों के चलते निरस्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से आई जांच के बाद इसका जवाब भी भेजा जा चुका है।
-एसके सुल्तानिया, अधीक्षण अभियंता, पीडब्लूडी