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नगर विकास मंत्री तक पहुंची 21 करोड़ ट्रांसफर की गूंज

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नगर पालिका के 21 करोड़ आरईएस को देने में खेल
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तीन साल से प्रशासक बने एडीएम विरोध के बाद भी ट्रांसफर किया बजट
नपाप के आधा दर्जन सभासदों ने मिलकर खोला एडीएम के खिलाफ मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। बिना किसी नियम और बगैर उच्चाधिकारियों से अनुमति लिए नगर पालिका का पैसा आरईएस को ट्रांसफर किए जाने का मामला एक बार फिर से तूल पकड़ने लगा है। नपाप के आधा दर्जन सभासदों ने एक मत होकर बतौर प्रशासक आरईएस को ट्रांसफर किए गए 21 करोड़ रुपए को लेकर एडीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं एक भाजपा नेता ने इसकी शिकायत गोंडा दौरे पर आए मुख्यमंत्री से तक से की है। जबकि हाल में मामले में सभासद वेद प्रकाश शुक्ला व सभासद दुष्यंत कुमार ज्ञान की ओर से इसकी शिकायत नगर विकास मंत्री से भी की गई है।
गौरतलब है कि बीते साढ़े तीन साल से गोंडा नगर पालिका चेयरमैन विहीन चल रही है। इसलिए इस नगर पालिका की पूरी जिम्मेदारी बतौर प्रशासक अपर जिलाधिकारी त्रिलोकी सिंह संभाल रहे हैं। बताया जाता है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में नगर पालिका के पास राज्य वित्त, 13वें वित्त, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि सहित अन्य मदों में कुल 21 करोड़ रुपये था। जिसे नपाप के प्रशासक/अपर जिलाधिकारी त्रिलोकी सिह ने आरईएस (ग्रामीण अभियंत्रण सेवा) को ट्रांसफर कर दिया। वह भी तब जबकि नगर पालिका और आरईएस दोनों ही अपने आप में कार्यदाई संस्थाएं है। सभासदों का आरोप है कि नगर पालिका में उस दरम्यान एक नहीं बल्कि तीन-तीन जेई जियालाल, केके सिंह व बृजेश यादव के संबद्ध थे। इसके बाद भी पालिका ने खुद काम कराने के बजाए इसका पैसा आरईएस को ट्रांसफर कर दिया। यहां तक कि बोर्ड बैठक में इसका सभासदों ने विरोध भी किया था। लेकिन सभासदों की बात को दरकिनार करते हुए अपर जिलाधिकारी ने इसका पैसा बिना किसी नियम-कानून के ही आरईएस को दे दिया। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री से 28 मई को गोंडा दौरे के दरम्यान भाजपा में संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे एक नेता ने की थी। वहीं हाल में इस संबंध में एक-एक शिकायतीपत्र सभासद बासू शुक्ला व सभासद दुष्यंत कुमार ज्ञान ने नगर विकास मंत्री को भेजा है। दोनों सभासदों ने नगर विकास मंत्री से मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
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तीन साल से नहीं देखने को मिली मिनट बुक
सभासद वेद प्रकाश उर्फ बासू शुक्ला का आरोप है कि उन्हें तीन साल से नगर पालिका में बोर्ड बैठक को लेकर बनाई गई मिनट बुक नहीं दिखाई जा रही। अब तक बोर्ड की जितनी भी बैठकें नगर पालिका मे हुई हैं, उन सभी बैठकों में प्रशासक ने मनमानी काम कराया और किसी की नहीं सुनी। यहां तक कि उन्होंने सभासदों से मिले प्रस्ताव को भी बोर्ड बैठक में पास नहीं किया।
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गुणवत्ताहीन हुए सारे काम
आरईएस को ट्रांसफर किए गए 21 करोड़ रुपये से जहां आवास विकास में शांती काम्प्लेक्स से डा. मनोज सिन्हा के घर तक नाले के बजाए 16 मीटर चौड़ी इंटरलाकिंग करवा दी गई तो वहीं अलग-अलग वार्डों में जो काम कराए गए, उनकी गुणवत्ता काम होने से काम पूरा होने तक संदेह के घेरे में है। जिसका जीता-जागता उदाहरण एलबीएस चौराहे से मनोरंजन चौराहे तक बनी वह सड़क़ है जिसकी गुणवत्ता खराब होने पर भाजपा शासनकाल में उसका दोबारा निर्माण कराया गया।
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पहली बात तो नगर पालिका से 21 करोड़ रुपये आरईएस को ट्रांसफर ही नहीं किए गए और नगर पालिका के जिस पैसे से आरईएस से काम कराया भी गया, वह सिर्फ इसलिए क्योंकि सरकार त्वरित विकास चाहती है। क्योंकि बड़े विभागों के पास संशाधन ज्यादा हैं और काम तेजी से होता है। उन्हें जल्दी से जल्दी काम कराना था, इसलिए जनहित के मद्देनजर ऐसा किया। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
-त्रिलोकी सिंह, अपर जिलाधिकारी/प्रशासक नगर पालिका
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