अक्षय तृतीया के दिन जिले में करीब 80 लाख रुपये के आभूषणों की ब्रिकी का अनुमान लगाया जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी परंपरा के अनुरूप लोगों ने आभूषणों की खरीददारी की। लोगों ने अक्षय तृतीया पर मंदिरों में पूजन-अर्चन कर भगवान शिव-पार्वती व विष्णु-लक्ष्मी से सुख-समृद्घि का आशीर्वाद मांगा। देर शाम तक सराफा दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ जुटी रही।
बैसाख मास शुक्लपक्ष तृतीया के दिन हर साल अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन लोग व्रत रखकर भगवान शिव-पार्वती व विष्णु-लक्ष्मी की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
ये भी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया पुण्य कभी नष्ट नहीं होता। लोगों का मानना है कि अक्षय तृतीया के दिन आभूषण खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
इसी मान्यता के तहत सोमवार को लोगों ने सराफा दुकानों से आभूषणों की खरीद की। सराफा एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आनंद अग्रवाल ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन जिले में करीब 80 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषणों की बिक्री हुई है।
उन्होंने ये भी बताया कि गत वर्ष की तुलना में इस साल सोने का भाव अधिक होने के चलते व्यवसाय पर असर पड़ा है। लगातार दैवीय आपदा झेल रहे किसानों की तंगहाली भी व्यापार में कमी की वजह बनी है। हालांकि देर शाम तक सराफा दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ जुटी रही।
लोग अपनी पसंद व क्षमता के अनुसार आभूषण खरीदकर अक्षय तृतीया की शुभता प्राप्त कर रहे थे। घरों तथा मंदिरों में लोगों ने व्रत आदि रखकर पूजा-अर्चना की।