गोंडा। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने के 48 घंटे के भीतर किसानों के खाते में भुगतान का दावा खोखला साबित हो रहा है। जिले में धान खरीद पूरा कर 94 क्रय केंद्र बंद हो गए लेकिन, किसानों का 7.18 करोड़ रुपया अभी फंसा हुआ है। वह बैंक से लेकर विपणन विभाग के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिले में छह क्रय एजेंसियों की ओर से 111 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद की जा रही थी। एक लाख दो हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष एक लाख 13 हजार मीट्रिक टन धान खरीद लिया गया। बीते पांच नवंबर तक 94 क्रय केंद्र बंद कर दिया गया। अब मात्र मार्केटिंग के 17 क्रय केंद्र चालू हैं लेकिन, सप्ताह भर बीतने के बाद बावजूद भी किसानों के खाते में सात करोड़ 18 लाख रुपये नहीं पहुंचा। अब किसान भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं।
केंद्र पर पड़ा 98000 क्विंटल धान:
धान खरीदकर मिलों को भेजा जाना है लेकिन, अभी तक एक लाख तीन हजार एमटी धान राइस मिलों को भेजा गया है, वहीं 98000 क्विंटल धान अभी भी क्रय केंद्रों पर डंप पड़ा है। जिससे बंद क्रय केंद्र की भी निगरानी करानी पड़ रही है।
150 रुपये बढ़ा गेहूं का दाम
- इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 150 रुपये बढ़ाकर 2425 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। एक मार्च से सरकारी दर पर गेहूं खरीद की शुरुआत की जाएगी। जिसके लिए किसानों का पंजीकरण शुरू हो गया है। अभी तक 3000 किसानों का पंजीकरण हुआ है। जिन किसानों ने पहले से पंजीकरण करा रखा है उन्हें सिर्फ नवीनीकरण कराना होगा।
खातों में दिक्कत होने से अटका भुगतान
अभी किसानों का सात करोड़ 18 लाख रुपये भुगतान अटका हुआ है। किसानों के खाते में ई-केवाईसी न होने के कारण पीएफएमएस से भुगतान लंबित हो जाता है। सभी किसानों से खातों को आधार से लिंक कराने की अपील की गई है।
प्रज्ञा मिश्रा, डिप्टी आरएमओ