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तीन-तीन माह तक नहीं मिलती मजदूरी, कैसे करें मनरेगा में काम

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मजदूरी भुगतान फंसने से मनरेगा से रूठ रहे श्रमिक
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गोंडा। जिले के श्रमिक मनरेगा के काम से अब दूर भाग रहे हैं। रोजगार गारंटी के बावजूद मजदूरों को मनरेगा योजना अब रास नहीं आ रही है। शहरों में अधिक मजदूरी मिलने व मनरेगा योजना में देरी से होने वाले भुगतान के चलते श्रमिकों का इससे मोहभंग हो रहा है। इसके लिए अफसरों की लापरवाही को कारण माना जा सकता है। इस योजना में न तो श्रमिकों को सौ दिन का रोजगार मिल रहा है और न ही समय से मजदूरी। मजदूरों को तीन तीन माह तक मजदूरी के लिए भटकना पड़ रहा है, जिससे मजदूर अब इस योजना से दूरी बना रहे हैं।
मनरेगा के अंतर्गत प्रत्येक श्रमिक को सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की गांरटी है। मजदूरी के 15 दिन के भीतर मजदूरी भुगतान का भी प्रावधान है, लेकिन इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालने वाले अफसरों की लापरवाही से यह कवायद महज कागजी बनकर रह गई है। जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत कुल 3.13 लाख जॉबकार्ड धारकों ने अपना पंजीकरण करवा रखा है। इनमें से करीब 1.78 लाख एक्टिव जॉबकार्ड धारक हैं जो इस योजना के तहत संचालित की जा रही 3755 परियोजनाओं में काम कर रहे हैं। लेकिन इन मजदूरों को न तो समय से मजदूरी मिल रही है और न ही सौ दिन का रोजगार। समय से मजदूरी न मिलने से इन श्रमिकों को अपने परिवार का पालन पोषण करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में मनरेगा योजना में काम करने वाले श्रमिक अब इस योजना से किनारा कर रहे हैं। मनरेगा में काम करने वाले श्रमिकों का कहना है कि काम करने के बाद तीन तीन माह तक मजदूरी के लिए प्रधान, सेक्रेटरी व रोजगार सेवक के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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इनसेट
7.97 करोड़ रुपये का भुगतान अटका
मनरेगा योजना मे काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी व सामग्री मद में भुगतान की स्थिति काफी खराब है। पिछले वर्ष की मजदूरी भी अब तक श्रमिकों को नहीं मिल सकी है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में मजदूरी 2.28 करोड़ रुपये व सामग्री अंश पर 3.01 करोड़ रुपये समेत कुल 5.33 करोड़ की बकायेदारी शेष है। इसी तरह से चालू वित्तीय वर्ष में 1.59 करोड़ रुपये की मजदूरी व 1.06 करोड़ रुपये सामग्री अंश के बकाया हैं।


इनसेट
कटरा, नवाबगंज व पंडरीकृपाल में सबसे अधिक बकायेदारी
मनरेगा योजना में फर्जीवाडे़ को लेकर चर्चित रहे कटरा बाजार, नवाबगंज व पंडरीकृपाल ब्लाक में सबसे अधिक बकायेदारी है। यहां कराये गए अधिकतर कार्यों में अनियमितता की गई। अब प्रशासन इसकी जांच कराने में जुटा है। जांच के कारण इन तीनों ब्लाकों में वित्तीय वर्ष 2016-17 की करीब 3.41 करोड़ व वित्तीय वर्ष 2017-18 मेें 57 लाख रुपये का भुगतान लंबित है।
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इनसेट
मनरेगा योजना के तहत अफसरों को समय से श्रमिकों के मस्टर रोल निर्गत करने व उन्हें भरकर मजदूरी दिलाने के लिए निर्देशित किया गया है। बकाया मजदूरी के भुगतान के लिए प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही श्रमिकों के खाते में मजदूरी पहुंच जायेगी। इसके अलावा श्रमिकों के पलायन को रोकने व उन्हे सौ दिन का रोजगार मिल सके इसके लिए भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
- वीरपाल, परियोजना निदेशक/प्रभारी डीडीओ
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