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डैमेज कंट्रोल के लिए पावर कारपोरेशन ने बनाया एक्शन प्लान

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डैमेज कंट्रोल के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने बनाया एक्शन प्लान
400 करोड़ के अधूरे बिजलीघर में फिर से जान फूंकने की तैयारी
पीएफसी से लोन और खर्च की पड़ताल करेगी केंद्रीय टीम
राजेश तिवारी
गोंडा। अगले साल गोंडा सहित मंडल के चार जिलों में होने वाली बिजली की भीषण कटौती से बचने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने अपने एक्शन प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है। हालांकि जिस उद्देश्य के साथ पांच साल पहले तरबगंज के लौव्वाटेपरा में 400 केवीए बिजलीघर की नींव डाली गई थी, अगर उसका काम तय समय में पूरा हो जाता तो शायद इसकी नौबत कभी नहीं आती। लेकिन निर्माणाकर्ता फर्म आईसोलेक्स के बिजलीघर का काम बीच में ही अधूरा छोडक़र फरार हो जाने से चारों जिलों में बिजली का संकट एकदम से काफी गहरा गया है। जिससे बचने के लिए पावर कारपोरेशन ने बिजलीघर के अधूरे बचे काम को पूरा कराने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी हैं। लेकिन इससे पहले इस बिजलीघर के निर्माण पर कितना पैसा पीएफसी (पावर फाइनेंस कंपनी) से लोन हुआ और कितना खर्च हुआ। इसकी जांच के लिए चेयरमैन ने एक कमेटी गठित की है। जो न सिर्फ बिजलीघर के निर्माण पर अबतक हुए खर्च का ब्यौरा जुटाएगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि पावर ग्रिड के जिन दो श्रोतों से यहां बिजली आनी है, उसका काम अब कितने पैसों में और कैसे होगा। हालांकि अगले साल तक इसका काम पूरा हो जाएगा। यह उम्मीद करना बेमानी है क्योंकि जानकारों की मानें तो इसमें कम से दो साल लग सकते हैं। तबतक के लिए मंडल के सवा करोड़ लोगों को बिजली के एक बड़े संकट से जूझना पड़ सकता है। पेश है रिपोर्ट-
इनसेट
अगले साल शहर में 6 से 8 तो गांवों में 14 घंटे कटौती के आसार
पूरे मंडल के लिए बिजली आपूर्ति का केंद्रबिंदु होने के बावजूद जेलरोड स्थित 220 केवी बिजली कंट्रोलरूम गोंडा को जो बिजली बस्ती से मिल रही है, उसकी क्षमता कुल 250 एम्पियर है। जबकि सोहावल से 650 एम्पियर बिजली गोंडा को दी जाती है। जबकि मंडल के चार जिलों में बिजली की खपत इससे कहीं ज्यादा 1300 एम्पियर के करीब है। वह भी आज के दिन। इस लिहाज से अगले साल तक खपत में 150 से 200 एम्पियर इजाफा होने की संभावना है। जिसके सापेक्ष बिजली की उपलब्धता महज 850 एम्पियर ही रहेगी। ऐसे में मंडल के चार जिलों में होने वाली बिजली कटौती का ग्राफ अगले साल क्या होगा। इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। क्योंकि मौजूदा वक्त शहर में बिजली की कटौती 3 से 4 घंटे हो रही है जबकि गांवों में 8 से 10 घंटे। लेकिन अगले साल तक अगर हालात ऐसे रहे तो यही कटौती शहर में बढक़र 6 से 8 घंटे हो जाएगी और गांवों में 14 से 16 घंटे।
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बन जाता बिजलीघर तो नहीं पड़ती किसी की जरूरत
पांच साल पहले पावर कारपोरेशन ने तरबगंज के लौव्वाटेपरा में 400 केवीए का बिजलीघर बनाए जाने का प्रस्ताव यूं हीं नहीं मंजूर किया था। इसके पीछे उसकी मंशा 630 मेगावाट बिजली सप्लाई मेंटेन करने की थी। जिसके सापेक्ष मंडल पूरे मंडल में बिजली की खपत 350 मेगावाट ही है। यही नहीं जो 1205 एम्पियर लोड मौजूदा वक्त पूरे देवीपाटन मंडल का है, उससे कहीं अधिक 1654 एम्पियर बिजली हर दिन इस बिजलीघर से कारपोरेशन को मिलती रहती। जिसके बाद न तो किसी आईपीपी की जरूरत कारपोरेशन को पड़ती न ही बस्ती व सोहावल से बिजली लेने की। पर्याप्त मात्रा में बिजली की उपलब्धता होने के नाते लौव्वाटेपरा से ही कई औैर जिलों को भी बिजली दी जा सकती थी। लेकिन टाइम बाउंड पीरिएड गुजर जाने के बाद भी बिजलीघर नहीं बन पाया। इससे मंडल में बिजली का संकट जबरदस्त तरीके से गहरा गया है।
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गोंडा में अगलस़ाल तक बिजली का संकट मौजूदा समय से दोगुना तक बढ़ने के आसार उन्हें पहले से ही दिखाई दे रहे हैं। गोंडा के लौव्वाटेपरा में निर्माणाधीन बिजलीघर पर अबतक जितना भी पैसा खर्च हुआ है, इसकी जांच टीम को करके अपनी रिपोर्ट ऊपर के अधिकारियों को देनी है। क्योंकि इसके बाद ही इसके काम को टेकओवर करते हुए अधूरे पड़े बिजलीघर को पूरा कराया जा सकता है।
-सुमन गुच्छ, डायरेक्टर प्लानिंग, पारेषण
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