किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान में फिसड्डी बजाज कुन्दुरखी चीनी मिल से 6,583 हेक्टेयर गन्न्ना रकबा छिनेगा। इसके लिए देवीपाटन मंडल की गोंडा, भंभुआ/मैजापुर व बहराइच गन्ना प्रबन्ध समिति ने गन्ना आयुक्त व विभागीय गन्ना अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा है।
प्रबंध समितियों ने कुन्दुरखी चीनी मिल क्षेत्र से 65 गन्ना क्रय केंद्र के 6,583 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल की कटौती कर पास की दूसरी मिलों को देने की सिफारिश की है। शासन ने प्रबंध समितियों के प्रस्ताव को बजाज कुन्दुरखी चीनी मिल के रवैये को देखते हुए निर्णय लिया तो बजाज कुन्दुरखी चीनी मिल का बड़ा गन्ना क्षेत्रफल छिनना तय माना जा रहा है।
पिछले पेराई सत्र 2015-16 में बजाज चीनी मिल की ओर से खरीदे गये गन्न्ना मूल्य का भुगतान आठ महीने बाद किया गया है जब कि किसानों को भुगतान 14 दिन के भीतर अदा करने का नियम है।
नियमों को ताक पर रखकर बजाज चीनी मिल ने किसानों को उन्हीं का पैसा समय से न देकर उन्हें खून के आंसू रुला दिये। यही नहीं चीनी मिल ने गन्ना समितियों का कमीशन भी काफी दिन तक दबाए रखा।
इससे नाराज गन्न्ना प्रबन्ध समितियों ने गन्ना आयुक्त की ओर से पहले दिये गये कार्रवाई के संकेत को देखते हुए कुन्दुरखी चीनी मिल क्षेत्र के किसानों का गन्ना पास के दूसरी चीनी मिलों को दिये जाने का प्रस्ताव भेज दिया।
किसान हित में प्रबंध समितियों की ओर से भेजे गये प्रस्ताव को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि आयुक्त ने इस हालात व समितियों के प्रस्ताव पर गौर किया तो कुन्दुरखी के गन्ना क्षेत्र के रियासत में भारी कटौती होनी पक्की है।
वहीं बजाज चीनी मिल सूत्रों की माने तो चीनी मिल प्रबंध तंत्र गन्ना समितियों के प्रस्ताव से चिंतित है। उसने अब अपने क्षेत्र के अपने कुछ खास किसानों को मिलाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।
चीनी मिल अधिकारियों के करीबी किसानों से गन्ना आयुक्त व गन्ना विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर यह मांग करायी जा रही है कि उनके क्षेत्र का गन्ना बजाज चीनी मिल के ही पक्ष में रखा जाए। वहीं चीनी मिल के महाप्रबंधक जीआईडी पांडेय का कहना है कि उन्हें गन्ना क्षेत्रफल के बदलाव के प्रस्ताव व कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है।