राप्ती नदी का कहर बाढ़ बनकर नहीं, बल्कि कटान के चलते किसानों पर टूट रहा है। नदी का जलस्तर घटते ही कई गांवों के निकट कटान तेज हो गई है। कई गांवों के किसानों की करीब 65 बीघा फसल व खेत नदी की धारा में समा गए हैं।
इस पर रोक लगाने की मांग के बावजूद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। रोजी-रोटी देने वाली खेती की जमीन नदी में विलीन होने से किसान चिंतित हैं। किसानों ने शासन-प्रशासन से नदी की कटान पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है।
गुरुवार को गौरा थाना क्षेत्र के नरायनपुर मंझारी निवासी राम स्वरूप, रामहेत, करतार मौर्या, छोटे यादव, राजाराम, माया देवी, लुब्बुड यादव व बरिखन यादव ने बताया कि गांव के निकट हो रही राप्ती नदी की कटान में इन लोगों की करीब 25 बीघे गन्ने की फसल खेत सहित नदी में समाहित हो चुकी है।
इन लोगों का कहना है कि गांव की करीब 40 बीघा जमीन कटान के चलते नदी के मुहाने पर आ गई है। यह जमीन भी किसी समय नदी की धारा में विलीन हो सकती है। इसके अलावा नदी रजवापुर, महरी, दिनमनजोत, सेवरही, देवलहा वीरपुर व कोल्हुईया आदि गांवों के पास भी तेजी से कटान कर रही है।
इन गांवों के लोगों की भी करीब 40 बीघा खेती की जमीन नदी में समा चुकी है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा कटान रोकने का काम कागजों पर अधिक तथा धरातल पर कम किया जाता है। कई बार कटान रोकने की गुहार लगाई गई, लेकिन प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
नदी गंगाबक्श भांगड, चौका कलां, चौकाखुर्द, चेतरापुरवा, टेंगनहिया, मानकोट गांवों के पास भी तेजी से कटान कर रही है। किसानों की बेशकीमती जमीन नदी की धारा में समाहित हो रही है। कटान रोकने के लिए प्रशासन द्वारा कोई उपाय न किये जाने से पीड़ितों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
राप्ती नदी के कटान प्रभावित गांवों में कटान रोकने का निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिया गया है। राजस्व कर्मी भी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं। कटान रोकने के लिए प्रशासन द्वारा हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। -गंगाराम गुप्त, एडीएम/ आपदा अधिकारी बलरामपुर