गोंडा। जिला महिला अस्पताल में बेहतर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच मरीजों का भरोसा डगमगाता नजर आ रहा है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं बीच में ही इलाज छोड़कर बिना डिस्चार्ज के ही घर लौट रही हैं या निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं।
पिछले तीन माह के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून तक भर्ती 3,620 गर्भवतियों में से 612 महिलाएं बिना सूचना दिए अस्पताल छोड़ गईं। यही स्थिति स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भी सामने आई, जहां 96 नवजातों को उनके परिजन बिना चिकित्सकीय अनुमति के अस्पताल से ले गए।
अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल में 822 गर्भवतियों को भर्ती किया गया, जिनमें 134 महिलाएं बिना डिस्चार्ज लिए चली गईं। मई में 1,302 गर्भवतियों में से 241 और जून में भर्ती 1,496 महिलाओं में से 237 मरीज बीच इलाज में ही अस्पताल छोड़कर चली गईं। तीन माह में 612 महिलाओं का इस तरह अस्पताल छोड़ना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों के भरोसे पर सवाल खड़े कर रहा है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद खाली : महिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। छह स्त्री रोग विशेषज्ञों के सापेक्ष केवल तीन, पांच निश्चेतक के सापेक्ष एक, छह बाल रोग विशेषज्ञों के सापेक्ष चार तथा दो रेडियोलॉजिस्ट के सापेक्ष केवल एक चिकित्सक तैनात हैं। कई विशेषज्ञों का स्थानांतरण भी हो चुका है।
ऐसे में सीमित डॉक्टरों पर मरीजों का दबाव बढ़ने से समय पर उपचार और परामर्श नहीं मिल पाता। अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं का दावा किया जाता है, लेकिन हेल्थ एटीएम महीनों से आयुष्मान भारत कक्ष में रखा है। जांच नहीं हुई।