गोंडा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर वन विभाग ने जिले में वाटर बाडीज को पुनर्जीवन देनेे के लिए जिला स्तर पर कार्य योजना तैयार उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
यह जानकारी देते हुए प्रभागीय वनाधिकारी आरके त्रिपाठी ने बताया है कि गोंडा अंतर्गत नेशनल वेटलैंड एटलस (रिमोट सेन्सिंग) में दर्शाए गए वेटलैंड की संख्या 2412 है। जनपद में अब तक चिन्हित 54 वाटर बाडीज को जिला वेटलैंड समिति द्वारा वेटलैंड के रूप में अधिसूचित कराया गया है। एनजीटी द्वारा इस संबंध में कार्य योजना तैयार कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी व वन विभाग के माध्यम से शीघ्र ही अधिक से अधिक वेटलैंड विकास की कार्य योजना बनाकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी जाएगी।
इसके अतिरिक्त पौधरोपण अभियान के तहत पौध रोपित किए गए स्थलों की जिओ टैगिंग कार्य भी जारी है। जिलाधिकारी ने जिओ टैगिंग कार्य में प्रगति न लाने वाले अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि वे इस कार्य में व्यक्तिगत रुचि लेकर जिओ टैगिंग का कार्य शीघ्र पूरा कराएं। जिलाधिकारी ने बताया कि पौधरोपण लक्ष्य के सापेक्ष विभागों द्वारा रोपित कराए गए स्थलों की जिओ टैगिंग में ग्राम्य विकास विभाग, कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा उद्यान विभाग के स्तर पर अभी सबसे ज्यादा जिओ टैगिंग लंबित है। उन्होंने बताया कि कुल 8190 रोपण स्थलों के सापेक्ष अब तक विगत सप्ताह 505 के सापेक्ष 1535 रोपण स्थलों की जिओ टैगिंग पूर्ण हो गई है।