करनैलगंज में आई बाढ़ से नवाबगंज बचा
खतरे के निशान तक पहुंचते ही नवाबगंज में भरने लगता था पानी
अबकी बार अयोध्या में खतरे के निशान पर स्थिर सरयू, पर नदी से बाहर नहीं आया पानी अमर उजाला ब्यूरो
नवाबगंज/गोंडा। जिले में हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाली दो तहसीलों में जहां करनैलगंज के कई गांव बाढ़ के पानी मे डूबे हुए हैं तो वहीं नवाबगंज मे सरयू नदी का पानी अभी तक नदी से बाहर नहीं आया है। जिससे यहां के लोग राहत महसूस कर रहे हैं। क्योंकि बीते वर्षों का यह रिकार्ड रहा है कि जब-जब सरयू नदी ने अयोध्या में खतरे के निशान का छुआ या इसे पार किया, तब-तब नवाबगंज के दर्जनों गांव के लोगों को बाढ़ की दिक्कतों से जूझना पड़ा। लेकिन अबकी बार हालात इसके ठीक उलट हैं। जिससे नदी का पानी नदी में ही है।
जिले की दो बड़ी तहसीलें करनैलगंज और तरबगंज हर साल बाढ़ से प्रभावित होती हैं। करनैलगंज तहसील में आज भी कई मजरे ऐसे हैं, जो बंधे के अंदर हैं। जबकि तमाम गांव व मजरे बंधे के मुहाने पर। परसपुर में चंदापुर किटौली गांव का असित्तव घाघरा नदी कब का समाप्त कर चुकी है। बावजूद इसके इस गांव के दो मजरे अभी भी जीवंत हैं, जो बिल्कुल घाघरा नदी से सटे और बंधे के भीतर हैं। पिछले साल करनैलगंज में एल्गिन-चरसड़ी बांध और उसके किनारे बने रिंग बांध के कट जाने से जो पानी बांध के रास्ते नवाबगंज आकर फैलना शुरू होता है, वही पानी मौजूदा वक्त करनैलगंज के गांवों में भर रहा है। जिससे नवाबगंज में संभावित बाढ़ के आसार काफी हद तक कम हो गए हैं।
ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि अभी तक जब-जब अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान को पार करती थी, तब-तब नवाबगंज में बाढ़ के हालात पैदा हो जाते थे। लेकिन बीते कुछ घंटों से अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान पर स्थिर है। बावजूद इसके नदी के पानी का फैलाव नवाबगंज के गांवों में अबतक नहीं हुआ है और पानी नदी के ही भीतर है। नवाबगंज में सरयू नदी के ठीक किनारे बसे साखीपुर गांव के लोगों की मानें तो अगर करनैलगंज में बांध न कटा होता तो जो पानी मौजूदा वक्त करनैलगंज के गांवों में भर रहा है, वही पानी उनके गांवों में भरता। यहां गांव के लोगों ने अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर है या नीचे, इसे मांपने के लिए गांव के बाहर नदी में एक बांस का डंडा गाड़ रखा है। जिससे वह नदी के जलस्तर को भांपकर उससे फैलने वाली तबाही को भांप लेते हैं।
बता दें कि नवाबगंज इलाके में सरयू नदी से क्षेत्र में आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए यहां न तो कोई बांध बना है, न ही ठोकर। जिससे बरसात के सीजन में जैसे ही नदी का जलस्तर बढ़ता है, वैसे ही इस इलाके में बाढ़ का खतरा मंडराना शुरू हो जारता है। लेकिन अबकी बार घाघरा से सरयू नदी में आने वाले पानी के करनैलगंज में कुछ हद तक गांवों मे भर जाने से इस इलाके में बाढ़ का खतरा जरूर कम हुआ है। जिससे यहां के लोग राहत महसूस कर रहे हैं।
इनसेट
नदी किनारे बसे यह गांव हर साल होते प्रभावित
नवाबगंज में साखीपुर, गोकुला, दत्तनगर, ब्यौंदा मांझा, इंदरपुर, नकहरा, जैतपुर मांझा, दुल्लापुर, तुलसीपुर मांझा सहित करीब एक दर्जन गांव ऐसे हैं, जो नदी के किनवरे-किनारे बसे हैं। हर साल जब भी नदी का पानी खतरे के निशान को छूता या उसे पार करता है तो यहां के लोगों की दिक्कतें नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ बढनी शुरू हो जाती हैं। लेकिन अबकी बार फिलहाल तो इस तरह के हालात यहां नहीं दिखाई दे रहे।