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स्कूलों में 50 फीसदी शौचालय अधूरे

Mon, 13 Jul 2015 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ गोंडा
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भारत स्वच्छता अभियान एवं विद्यालय स्वच्छता अभियान की हकीकत जानने आए भारत सरकार के अनुसचिव को अब तक भले ही सब कुछ साफ सुथरा दिखाया गया हो लेकिन असलियत कुछ अलग है। वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में दो दर्जन से अधिक स्कूलों में शौचालयों का निर्माण ही नहीं हो पाया है।
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जहां हुआ है उसमें 50 फीसद शौचालय या तो अधूरे हैं या फिर निष्प्रयोज्य। ऐसे में शासन व प्रशासन सफाई व स्वच्छता का चाहे जितना ढिंढोरा पीटे, लेकिन विद्यालयों में इसका असर नहीं दिख रहा है। यहां बने अधिकतर शौचालय मानक विहीन या अधूरे हैं।

जो पूर्ण भी हैं, उनका प्रयोग ही नहीं होता। सोमवार को क्षेत्र के कुछ विद्यालयों का मुआयना किया तो अधिकतर विद्यालयों में शौचालय का प्रयोग नहीं होते मिला। कहीं शौचालय में दरवाजा नहीं है तो कहीं सीट ही गायब है। आधे अधूरे शौचालयों के चलते लोगों को बेहद परेशानी हो रही है। खंड शिक्षा अधिकारी रामराज यादव ने बताया कि विकासखंड के सभी स्कूलों में शौचालय दुरुस्त कराने का निर्देश प्रधानाध्यापकों को दिया जा चुका है।
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प्राथमिक विद्यालय मोफिया
विद्यालय में 80 छात्र-छात्राओं के लिए बना शौचालय अधूरा है। सहायक अध्यापिका ऋचा तिवारी ने बताया कि इससे सभी को परेशानी का सामना करना पड़ता है

पूर्व माध्यमिक विद्यालय
विद्यालय का शौचालय टूटा हुआ है। प्रधानाध्यापिका जेएम सिंह व अध्यापिका इंदुबाला सिंह ने बताया कि नामांकित 35 छात्र-छात्राओं को खुले में शौच जाना पड़ता है।


कन्या प्राथमिक विद्यालय पिपरा चौबे
स्कूल में शौचालय तो बना है लेकिन न तो दरवाजा और न ही सीट। प्रधानाध्यापिका विजयलक्ष्मी ने बताया कि नामांकित 82 बच्चों को बेहद परेशानी होती है।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय मल्लापुर
स्कूल के शौचालय में दरवाजा है तो सीट नहीं। यहां प्रधानाध्यापक मनीराम के अलावा तीन अध्यापिकाएं तैनात हैं। शौचालय न सही होने से नामांकित 123 बच्चों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
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