45 निजी सेंटरों पर होगा गर्भवतियों का मुफ्त अल्ट्रासाउंड
क्यूआर कोड दिखाकर महीने में चार दिन करा सकेंगी मुफ्त जांच
प्रत्येक अल्ट्रासाउंड पर संचालक के खाते में पहुंचेंगे 300 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। गर्भवस्था में महिलाओं को अल्ट्रासाउंड व प्रसव पूर्व जांच करवाने के लिए जिला महिला अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्हें स्थानीय सीएचसी के पास संचालित निजी सेंटरों पर भी मुफ्त अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल जाएगी। प्रत्येक महीने के एक, नौ, 16 व 24 तारीख को फ्री अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलेगी। जिसके लिए संचालक को प्रत्येक अल्ट्रासाउंड पर 300 रुपये विभाग की ओर से दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के अनुसार जिले में 49 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। जिनके सुरक्षित प्रसव के लिए कम से कम तीन बार अल्ट्रासाउंड व अन्य प्रसव पूर्व जांच कराना आवश्यक है। जबकि अल्ट्रासाउंड की सुविधा सिर्फ जिला महिला अस्पताल में ही मिल रही है। सुदूर सीएचसी की गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड कराने जिला महिला अस्पताल आना पड़ता है। शासन के निर्देश पर महिला अस्पताल के पास व ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी के पास संचालित 45 अल्ट्रासाउंड सेंटरों को गर्भवतियों को मुफ्त सुविधा देने के लिए पैनल में शामिल किया गया है। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सीएचसी पर संबंधित महिला के मोबाइल नंबर से एक क्यूआर कोड जेनरेट होगा। जिसका प्रिंट ले जाकर गर्भवती संबंधित सेंटर पर मुफ्त अल्ट्रासाउंड करवा सकेंगी। वहीं मरचेंट एप पर क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद महिला के नंबर पर ओटीपी जाएगी। ओटीपी डालने के बाद संचालक के खातें में 300 रुपये क्रेडिट हो जाएगा।
मुख्यालय में यहां मिलेगी सुविधा
-गोंडा मेडिकल सेंटर पटेलनगर
-कस्तूरी हॉस्पिटल स्टेशन रोड गोंडा
- हनू अल्ट्रासाउंड सेंटर
- एके अल्ट्रासाउंड सेंटर
- प्रकाश डायग्नोस्टिक सेंटर
-रमन डायग्नोस्टिक सेंटर
- नोवा स्कैन एंड डायग्नोसिस्ट सेंटर
-सनराइज हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर
- आशा देव मेमोरियल हॉस्पिटल
- देवांगन हॉस्पिटल
- नेशनल डायग्नोसिस्ट सेंटर
- लॉजिक एमेजिन एंड डायग्नोसिस्ट सेंटर
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वर्जन
लापरवाही बरतरने वालों पर होगी कार्रवाई
मुफ्त अल्ट्रासाउंड के लिए चयनित सेंटरों पर यदि संचालक मना करता है अथवा सीएचसी पर क्यूआर कोड देने में लापरवाही होती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक महीने में चार दिन मुफ्त अल्ट्रासाउंड की सुविधा दिया जाना अनिवार्य है।
-डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ