किताब दे नहीं पा रहे, दावा कांवेंट जैसी सुविधा का
बिना किताब 3.72 लाख नौनिहाल सीख रहे ककहरा
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। प्रदेश की सरकार परिषदीय स्कूलों की दशा को सुधारने लिए भले ही लाख दावा करे लेकिन अफसरों का रवैया सुधार की इन कवायदों पर भारी पड़ रहा है। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत अप्रैल से हो चुकी है लेकिन तीन महीना बीतने के बावजूद अफसर इन स्कूलों के बच्चों को किताब तक नहीं उपलब्ध करा सके हैं। इन अफसरों ने पहली जुलाई को नौनिहालों को किताब व स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराने के दावे की हवा निकाल दी है। जुलाई का पहला सप्ताह बीत चुका है लेकिन जिले के परिषदीय स्कूलों मे पढ़ने वाले 3.72 लाख नौनिहाल बिना किताब के ही निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से मुकाबले की तैयारी कर रहे हैं।
प्रदेश मे सरकार भले ही बदल गई हो लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग मे तैनात अफसर अपना रवैया बदलने को तैयार नही है। अफसरों की इस कार्यशैली से परिषदीय स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने का सरकार का दावा फिसड्डी साबित हो रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सरकारी स्कूलों मे पढ़ने वाले बच्चों को निजी स्कूलों के छात्रों के समान शिक्षा का स्तर देने के लिए अंग्रेजी की शिक्षा पर जोर दे रहे हैं, वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर इन बच्चों को हिंदी की किताब समय से उपलब्ध करा पा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने नए शैक्षिक सत्र के शुरुआत में ही ऐलान किया था कि पहली जुलाई को परिषदीय स्कूलों मे पढ़ने वाले नौनिहालों को किताबें व स्कूल यूनीफार्म उपलब्ध करा दिया जाएगा लेकिन अफसर न किताब उपलब्ध करा सके न यूनीफार्म ही दे सके। ऐसे में परिषदीय स्कूलों का नया शैक्षिक सत्र एक बार फिर बिना किताबों के बीत रहा है। स्कूलों मे बच्चे बिना किताब के ही ककहरा सीख रहे हैं।
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3.72 लाख बच्चों को 12 लाख किताबों की दरकार
जिले के 3125 सरकारी स्कूलों मे पढने वाले 3.72 लाख नौनिहालों को देने के लिए 12 लाख किताबों की आवश्यकता है। इन किताबों की खरीद के लिए जून माह मे क्रय आदेश जारी किया गया था। इस क्रय आदेश के सापेक्ष अब तक सिर्फ 1.72 लाख किताबों की खेप जिले मे आई है। इस खेप मे कक्षा 6,7 व 8 की ही किताबे है। प्रथमिक स्तर की एक भी किताब अब तक जिले को नहीं मिली है।
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शिक्षकों के सिर फूटता है अफसरों की लापरवाही का ठीकरा
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अनूप कुमार सिंह का कहना है कि स्कूलों मे समय से किताब पहुंचाने की जिम्मेदारी अफसरों की है, लेकिन समय पर इन अफसरों की नींद नहीं टूटती। इस वर्ष ही किताबों का क्रय आदेश समय से जारी नहीं हो सक। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कभी कार्रवाई नहीं होती। स्कूल में समय से किताब न मिलने के कारण शिक्षक बच्चों को कैसे पढ़ाएं यह देखने वाला कोई नहीं है। बस स्कूलों का शैक्षिक स्तर खराब होने का ठीकरा शिक्षकों के सिर फोड़ दिया जा ता है। अनूप ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बच्चों को किताब उपलब्ध कराने की मांग की है।
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राज्य स्तर से टेंडर प्रक्रिया मे देरी की वजह से किताबों की आपूर्ति मे देरी हुई है। जो भी किताबें आई हैं उनका आवंटन किया जा रहा है। किताबों की जल्द आपूर्ति के लिए निदेशालय के पत्र लिखा गया है।
-संतोष कुमार देव पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी