गोंडा। गंभीर मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराए गए 33 वेंटीलेटर ताले में बंद हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोग निजी अस्पतालों में हजारों रुपये प्रतिदिन खर्च करके इलाज कराने को मजबूर हैं।
मौसम में बदलाव के कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सांस के रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। सांस के रोगियों को मेडिकल कॉलेज लाया जाता है। चिकित्सक दवा करके उन्हें ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध कराते हैं, लेकिन वार्डों में लगे ऑक्सीजन पैनल भी खराब हैं। ऐसे में दिक्कतें आ रही हैं। गंभीर स्थिति में मरीजों को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है, जिससे उन्हें रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज में वेंटीलेटर ताले में बंद हैं। इनका संचालन नहीं हो पा रहा है। लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों रुपये वेंटीलेटर के एवज में खर्च करने पड़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने का कहना है कि वेंटीलेटर ठीक हैं। इनके संचालन के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं, स्टाफ की कमी भी है। प्रयास रहता है कि मरीजों को सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएं। कर्मचारियों की तैनाती को लेकर लिखापढ़ी की जा रही है। (संवाद)