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228721 श्रमिकों के रोजगार को दबाए बैठी हैं 316 पंचायतें

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गोंडा। जिले के मनरेगा श्रमिकों को रोजगार देने से पंचायतें आनाकानी कर रही हैं। 1054 पंचायतों को लक्ष्य पूरा करने के लिए हर दिन 55686 श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार देना है। 316 पंचायतों ने कार्य ही नहीं किया, जिससे 28721 श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। वहीं सामग्री पर 10 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। जिससे श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। मनरेगा कार्यों की जांच में ब्लॉक स्तर पर हो गई बड़ी लापरवाही सामने आई हैं। पंचायतों में कार्य की शुरुआत ही नहीं कराया गया है। इस पर अधिकारियों को चेतावनी भी मिली लेकिन कोई असर नहीं दिख रहा है।
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गांव के गरीबों का पलायन रोकने और उन्हें 100 दिन का रोजगार दिए जाने की योजना तैयार की गई है। दिसंबर माह में 47 लाख 95 हजार 216 मानव दिवस सृजित किए जाने का लक्ष्य तय किया गया था। 13 दिसंबर को मिली रिपोर्ट में 38 लाख 48 हजार 543 मानव दिवस ही सृजित किए गए मिले। इससे लक्ष्य के सापेक्ष कार्य नहीं होना पाया गया है। सबसे अधिक लापरवाही झंझरी, बभनजोत, रुपईडीह, छपिया, मनकापुर, इंटियाथोक, हलधरमऊ, मुजेहना, पंडरी कृपाल, बेलसर में उजागर हुई हैं। यहां की पंचायत लक्ष्य से 20 फिसदी से अधिक से पीछे हैं।
रोजागार मुहैय्या कराने के लिए कार्य शुरु न कराए जाने से लक्ष्य प्रभावित है। हर दिन 55686 मजदूरों को रोजगार देने पर ही मानव दिवस का लक्ष्य पूरा हो सकेगा। लेकिन 1054 पंचायतों में 738 पंचायतें ही कार्य कर रही हैं और 26965 श्रमिकों को ही कार्य पर लगाया गया है। इसके अलावा 316 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिन्होने मनरेगा का कार्य शुरू ही नहीं कतिया है। जिससे 28721 श्रमिक रोजगार से ही वंचित हैं। बताया जा रहा है कि पंचायतों की ढिलाई से मनरेगा के श्रमिकों को नियमित रोजगार नहीं मिल रहा है।
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ऐसा तब है जब मनरेगा नियमों के तहत हर दिन पंचायतों में एक कार्य जरूरी होते रहे हैं। कार्य की कमी बताने पर जिले से निर्देश भी जारी हुए और चकरोड निर्माण के साथ ही खेल मैदान विकसित कराया जाए। इससे नियमित कार्य भी होते रहेंगे और श्रमिकों को रोजगार भी उपलब्ध होगा। इसके बावजूद 316 पंचायतों ने न तो कार्य किया और न ही श्रमिकों को रोजगार ही दिए जा सके। इससे 28721 श्रमिक रोजगार से वंचित हैं। जिले में मनरेगा के दो लाख श्रमिक पंजीकृत हैं लेकिन कार्य न होने से वह हाथ पर हाथ पर धरे बैठे हैं।
मनरेगा के भुगतान में खेल, सामग्री पर फिर 10 करोड़ अधिक खर्च
मनरेगा के भुगतान में खेल नहीं थम रहा है। फिर एक बार श्रम व सामग्री के भुगतान के तय मानक की अनदेखी गई है। नियमों के तहत 60 फीसदी बजट श्रम पर खर्च होगा और फिर 40 फीसदी सामग्री पर खर्च होगा। नियम की अनदेखी करके मुजेहना, वजीरगंज, नवाबगंज, इंटियाथोक, तरबगंज, पंडरी कृपाल ब्लॉक में 10 करोड़ से अधिक का बजट सामग्री पर अधिक खर्च कर लिया गया है। इन ब्लाकों में 40 फीसदी से अधिक का बजट सामग्री पर खर्च किए जाने की बात सामने आई है। दिसम्बर माह में श्रम पर भुगतान करके अनुपात सही करने का मौका ब्लॉकों को दिया गया है। इसके बाद कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मनरेगा कार्यों से अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिए जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है। मानव दिवस का लक्ष्य पूरा करने के साथ ही श्रम व सामग्री के अनुपात में अंतर ठीक करने की हिदायत दी गई है। कार्यों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। -आशीष कुमार, सीडीओ
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