55 करोड़ से सड़क संवारने का काम ठप
गोंडा। मुख्यालय के झंझरी ब्लॉक से उमरीबेगमगंज तक करीब 26 किलीमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण का काम अचानक ठप हो गया है। माह जनवरी में 55 करोड़ से इस मार्ग की दशा सुधरने का सपना क्षेत्र के करीब दो लाख की आबादी ने देखना शुरू किया। खींचतान और लोस चुनाव के दबाव को देखते हुए काम भी शुरू हुआ। बड़ी चतुराई से सड़क का निर्माण शुरू हुआ और अब वर्तमान सड़क के दोनों तरफ खुदाई करके पत्थर डाल दिए गए और काम रुक गया। अब वही पत्थर लोगों को चुभने लगे हैं।
गोड़वाघाट से आगे बढ़ते ही बीच की गड्डायुक्त सिंगल रोड़ पर उछाल मारते हुए अगल-बगल के पत्थरों से डरते हुए कदम आगे बढ़ते हैं। 26 किमी तक का सफर दिल थाम कर ही तय हो पाता है। काम रूकने के बाद से लोगों को कब शुरू होगा का डर सता रहा है। चुनावी शोर खत्म होने के बाद काम की गूंज कानों पर पड़नी बंद होनी चौंकाने वाली है।
गोंडा से उमरीबेगमगंज तक की रोड़ सिर्फ तरबगंज क्षेत्र के लोगों के लिए ही नही करनैलगंज और सदर विधानसभा के लोगों के लिए सुगम राह है। इस मार्ग की स्थिति पहले सबसे अच्छी थी लेकिन बीते वर्ष 2012 में बालपुर का पुल टूटने के बाद मुख्यालय से लखनऊ, बाराबंकी समेत दिल्ली तक की जाने वाली बसों, ट्रकों आदि वाहनों को इसी मार्ग से भेजा जाने लगा। बालपुर पुल के बनने और चालू होने लम्बा वक्त लगा। वर्ष 2016 तक सिंगल रोड से डबल डेकर बसों व ट्रकों को निकाला जाता रहा। इसके कारण सड़क चरमरा ही नहीं टूट गई।
उस समय की तत्कालीन सपा सरकार में भी रोड की स्वीकृति हुई लेकिन सरकार बनने के बाद कार्य आगे नही बढ़ सका। फिर स्थानीय सांसद और विधायक के प्रयासों से लोकसभा चुनाव के पहले 55 करोड़ की लागत से रोड को संवारने की योजना धरातल पर उतरते दिखी। तीन-तीन विधानसभाओं के साथ ही मां बाराही देवी मंदिर को जाने वाले श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। काम ही ऐसा था कि दो लाख से अधिक की आबादी का दिल बाग-बाग हो गया।
जनवरी में प्रक्रिया शुरू हुई और आदर्श आचार संहिता लागू होने के पहले कार्य भी शुरू हो गया। इससे क्षेत्र के करीब 100 गांवों के लोग मचल उठे। मानो मन की मुराद पूरी हो गई। लेकिन बुधवार को तरबगंज क्षेत्र के सफर के दौरान लोगों के मन में अजीब सवाल उमड़ते दिखे। तरबगंज क्षेत्र राम कुमार कहते हैं कि काम तो बहुत सही था लेकिन रुक गया अब देखो कब शुरू होगा। मंडी तक अनाज लाने में खून के आंसू बहाने वाले किसान शिव पूजन कहते हैं कि सड़क बहुत जरूरी है और काम ठप्प होने से डर लग रहा है। इस तरह पूरे क्षेत्र के लोगों के सपनों की एक अजीब सी काली छाया मंडरा रही है।
आठ कस्बों के जी का जंजाल बन गई है रोड
गोंडा से उमरीबेगमगंज तक जाने वाली यह रोड़ आठ कस्बों के जी का जंजाल बन गई है। सड़क को खोद कर पत्थर डालने से इन कस्बों के लोग सहमे रहते हैं। घर से बच्चे निकलते हैं कि उनकी सांसें तब तक अटकी रहती है। सड़क किनारे बसे गोड़वा घाट, माधवपुर, आजाद नगर, विजय नगर, रगड़गंज, आदमपुर, अठ्ठइसा व उमरी बाजार की स्थिति ऐसी है कि राह चलना दूभर है। सड़क के निर्माण से कस्बे की सूरत बदलने की भी उम्मीद जगी थी लेकिन काम रुकने के बाद फिर एक बार सभी का दिल धड़क रहा है। काम में देर होने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
देरी हुई तो बारिश के समय में फिर लटकेगा निर्माण
गोंडा-उमरी मार्ग का निर्माण जून से पहले पूरे किए जाने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को काम कराने वाले झटका दे रहे हैं। जिस रफ्तार से कार्य हो रहा है वह चौंकाने वाला है। जून तक निर्माण पूरा न हुआ तो बारिश के समय काम लटकेगा। जून के बाद मौसम में परिवर्तन होगा और बारिश के समय में सड़क की पेंटिंग काम कार्य संभव कम होगा। ऐसे में कार्य देर होने से लोगों में निर्माण को लेकर चिंता है।
वित्तीय स्वीकृति होते ही शुरू हो जाएगा कार्य
गोंडा-उमरी मार्ग का निर्माण चुनाव व वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष बजट को लेकर रुक गया था। सभी अड़चनें दूर हो रही हैं। जल्द ही आगे का बजट जारी होगा। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। सड़क का निर्माण शासन की प्राथमिकता में है। -उपेन्द्र कुमार, अवर अभियंता, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-दो