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एक हजार बीघा जमीन निगल गई घाघरा, बांध पर कटान जारी

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600 बीघा जमीन घाघरा में समाई, कटान तेज होने से दहशत
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गोंडा। घाघरा का तांडव जारी है। सोमवार सुबह तक घाघरा घट कर खतरे के निशान से 12 सेमी पर पहुंच गई थी लेकिन शाम को घाघरा में फिर बढ़ने का क्रम शुरू हो गया। शाम को खतरे के निशान से 15 सेमी हो गई। घाघरा पिछले 24 घंटे 600 बीघा जमीन निगल गई।

घाघरा के तेज बहाव से रिंगबांध कमजोर होता जा रहा है। बांध को बचाने के लिए दिन रात काम चलता रहा लेकिन सोमवार को बरसात होने के कारण बचाव कार्य में तेजी नहीं लाई जा सकी। बांध कटान रोकने के लिए हजारों बोरियां बालू भरी बोरियां, पेड़ों की टहनियां बांध के किनारे डालने का काम जारी रहा।
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रविवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर था तो सोमवार की सुबह वह घटकर 12 सेंटीमीटर पर आ गया। उसके बाद बरसात का पानी जब घाघरा में आने लगा तो नदी एक बार फिर बढ़ने लगी जिससे घाघरा का जलस्तर सोमवार की शाम को 15 सेंटीमीटर खतरे के निशान से ऊपर था।

दूसरी और घाघरा का पानी लगातार बांध की कटान में लगा हुआ है। प्रशासन द्वारा ग्राम नकहरा के सामने बनाए गए अस्थाई रिंग बांध को गलत तरीके से बना देने के कारण घाघरा का पानी सीधे अब उस बांध से टकरा रहा है।

जहां कटान रोक पाना सिंचाई विभाग के लिए किसी जंग से कम नहीं है। लगातार सिंचाई विभाग के अधिकारी कर्मचारी और मजदूर बांध पर काम कर रहे हैं। सैकड़ों बालू भरी बोरियां, पेड़ों की डाल और सीमेंटेड बोल्डर नदी में डाले जा रहे हैं। उसके बावजूद कटान में कमी नहीं आ रही है।

इस बांध को आनन फानन में प्रशासन द्वारा ग्रामीणों का विरोध देखते हुए किसी तरह से अस्थाई बांध को एल टाइप में बना दिया गया। मगर अब एक तरफ घाघरा के बहाव का रुख सीधा ग्राम नकहरा की ओर हो रहा है तो अस्थाई बांध में कटान भी तेज हो गई है।

सोमवार को सुबह ग्राम नकहरा के सामने रिंग बांध में कटान तेज होने के कारण ग्रामीणों के साथ बांध को बचाने में लगे अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। एक तरफ बरसात होने के कारण बांध पर वाहनों का आवागमन नहीं हो पा रहा था। जिससे बांध तक बालू भरी बोरियों, बोल्डर, ईंट, पत्थर व पेड़ की टहनियां लाने में दिक्कत हो रही थी।

इस बांध के बगल में बनाए गए स्पर व ठोकर भी कटान की जद में है। प्रशासन व सिंचाई विभाग का पूरा फोकस अब इसी रिंग बांध पर हो गया है। करनैलगंज क्षेत्र की एक लाख आबादी जो पिछले कई वर्षों से बाढ़ का दंश झेल रही है उसके लिए यह बांध अब मुसीबत बनता जा रहा है।

बांध बनवाते समय प्रशासन द्वारा इस बात को ध्यान में नहीं रखा गया कि बांध को सीधा रखने के बजाय एल टाइप बना दिया गया। जिस के कोने पर घाघरा की कटान होने से उस कटान को रोकना प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। मौके पर मौजूद अधिकारियों की माने तो वे स्वयं इस बात को लेकर सशंकित हैं। फिर भी क्षेत्र को बचाने के लिए बांध को मजबूत करने में लगे हैं।

सबसे अहम बात यह है कि ग्राम परसावल, रायपुर, नैपुरा, बांसगांव, बेहटा, रायपुर के सामने नदी अपना रौद्र रूप धारण करती जा रही है। पानी के घटते बढ़ते स्तर से बांध की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं।
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बरसात इन बांधों के लिए एक अभिशाप ही साबित हो रही है। बरसात होने के नाते मरम्मत कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बांध पर मौजूद सहायक अभियंता अमरेश सिंह, अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गए किसी भी बात पर कोई खतरा नहीं है। मगर अस्थाई रूप से बनाए गए रिंग बांध पर जगह-जगह नदी कटान करने पर तुली हुई है। जिसे रोकथाम करने के लिए लगातार प्रयास युद्धस्तर चलाया जा रहा है।
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