भयावह हुई घाघरा, बाढ़ में डूबकर युवक की मौत
बाढ़ का तांडव जारी, अब तक 800 घर घाघरा में समाए
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। घाघरा व सरयू के साथ अब टेढ़ी नदी में भी उफान आ गया है। रविवार को तरबगंज के घांचा गांव के पास सुबह युवक का पैर टेढ़ी नदी के पुल के पास पैर फिसल गया जिसमें उसकी डूबने से मौत हो गई। वहीं करनैलगंज, परसपुर, तरबगंज व नवाबगंज इलाके में घाघरा का तांडव जारी है।
घांचा गांव में रविवार सुबह युवक घाघरा के पानी में डूब गया। प्रधान अनिल पांडेय की सूचना पर पहुंचे तहसीलदार महेंद्र प्रताप सिंह और थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने शव को पानी से निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। तहसीलदार ने बताया कि घांचा गांव का मधइया पुरवा निवासी लवकुश पुत्र जगेशर (26) वर्ष शौच के लिए गांव के बाहर पुलिया के पास गया था जहां पैर फिसलने से मौत की सूचना मिली। शव को पंचनामा करा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। बताते चलें कि लवकुश के पिता की मौत हो चुकी है। माता फुलेश्वर, पत्नी रेनू तथा बच्चे राज (4) व राहुल (2) हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
वहीं करनैलगंज के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कच्चे एंव फूस के घरों के गिरने का सिलसिला चल पड़ा है। जगह-जगह गावों में कच्चे घर धराशाई होते जा रहे हैं। रविवार को ग्राम घरकुंइया से एक 80 वर्षीय बीमार व लाचार बुजुर्ग को टीम ने मोटर बोट से बाहर निकाला। अब तक एक अनुमान के मुताबिक करीब 800 कच्चे घर घाघरा की चपेट में आकर गिर चुके हैं। हालांकि अभी जलभराव के चलते प्रशासन गिरे घरों का सर्वे नहीं करा सका है। रविवार तक इस तहसील के 806 मजरों में जलभराव व बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। करीब एक लाख 40 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। करीब 400 मजरे बाढ़ के पानी में डूबे हैं तो 100 से अधिक मजरे टापू बने हुए हैं। तीन सौ मजरे ऐसे हैं जो बाढ़ के पानी से घिरे होने के साथ दो से तीन फिट तक जलभराव है।
जलस्तर घटा, बांध में कटान शुरू
करनैलगंज। रविवार को घाघरा का पानी अचानक तेजी से घटने लगा। घटते जलस्तर ने बांध को अपना निशाना बनाया है। बांसगांव के पास बांध का करीब 30 मीटर तो ग्राम नकहरा के पास बांध का करीब 15 मीटर से अधिक हिस्सा कटकर नदी में पहले ही समा चुका है। ग्राम बेहटा के सामने घाघरा ने बांध में कटान तेज कर दिया है। इसके अलावा कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि बांध के करीब 500 मीटर से अधिक हिस्से में नदी ने एक तरफा कटान शुरू कर दिया है। जिससे बांध के बीच नदी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार की शाम तक करीब 60 सेंटीमीटर घटे जलस्तर से बांध की सामत आ गई। 500 मीटर से अधिक बांध के हिस्से मेें नदी की एक तरफा कटान शुरू हो गई है। ग्राम बेहटा के सामने बांध के हिस्से में तेज कटान हो रही है। चारों तरफ भरे पानी की वजह से बांध को बचाने के लिए सामग्री को बांध तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
पीड़ितों ने सुनाया दर्द
परसपुर। पसका के बंधे पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि चारों तरफ पानी का सैलाब ही नजर आ रहा है। परंतु पीड़ितों को एक-एक दाने के लिए मोहताज होना पड़ रहा रहा है। इस दैवी आपदा में भी लोग ईश्वर से नहीं डर रहे है। हम लोग बंधे पर रात गुजार रहे है। राहत सामग्री पसका पुल के आस पास बंधे पर शरण लिए लोगों को ही देकर लोग इतिश्री कर लेते है। परंतु बंधे से आगे चंदापुर किटौली के आस पास बंधे पर कोई झांकने तक नहीं आता है। यहां न तो खाने का कोई सामान है और न ही पीने का पानी तथा प्रयाप्त संख्या नाव तक की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जो भी राहत आता भी है। उसे भाई भतीजा वाद तथा लोकल राजनीति की भेंट चढ़ जाता है। ग्राम कोयलारिहन पुरवा पसका निवासी रामपाल, रामसुघर, रामअधार, सुरेश, जबलू, प्रेमकुमारी तथा राजाराम ने बताया कि हम लोग पसका पुल के बंधे से छह सात किलोमीटर चंदापुर किटौली के पास पड़े हुए है। यहां प्रयाप्त मात्रा में नावें तक प्रशासन नहीं लगा सका है। हम लोग बाढ़ के पानी में तैर कर आते जाते है। पीने के लिए स्वच्छ पानी तक की व्यवस्थाि नहीं है। पानी पीने के लिए काफी दूर तक जाना पड़ता है। यहां तिरपाल के अलावा अभी तक सरकारी राहत नहीं मिल पाया है। सरकारी राहत सिर्फ पसका के आसपास बसे लोगों को ही दिया जा रहा है।
इनसेट
इस बेटी ने लकड़ी के बोटे को बना दिया नाव
तरबगंज। प्राकृतिक आपदा पर हौसलों से भरी उड़ान भारी है। ऐसा ही कुछ दृश्य रविवार को घाघरा के कछार में बसे गांव बेउदा माझा में देखने को मिला। चारे की तलाश में रीना(15) पुत्री फूलचंद यादव एक लकड़ी के लट्ठे के सहारे लहरों से जूझती दिखी। प्रधान केशवराम यादव ने बताया कि गांव चारों और बाढ़ से घिरा है। सड़कें कट गई हैं। ऐसे में लहरों से जूझती यह लड़की गांव की अन्य लड़कियों की रोल मॉडल है। यह कक्षा 8 की छात्रा है। गांव में ही स्थित जूनियर हाई स्कूल में पढ़ती है। स्कूल बंद है। यह लड़की प्रतिदिन लकड़ी के लट्ठे के सहारे चारा लाकर मवेशियों को खिलाती है।