करनैलगंज के धनावा को जाने वाली मुख्य सड़क शुक्रवार रात में पानी का दबाव न झेल पाने के कारण कट गई। इस सड़क के कटने से करनैलगंज के करीब 300 से अधिक गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
घाघरा का पानी तेज बहाव के साथ गांवों में फैल रहा हेै जिससे बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या शनिवार को बढ़कर 806 तक पहुंच गई। पानी के दबाव से एल्गिन चरसड़ी बांध 20 मीटर हिस्सा कटकर घाघरा में समा गया। अभी भी बांध का चार सौ मीटर हिस्सा कटान के दायरे में है।
घाघरा नदी के पानी से होने वाली तबाही शनिवार को शभी जारी रही। शुक्रवार की देर रात घाघरा नदी की कटान व पानी के तेज बहाव के कारण करनैलगंज से धनावा जाने वाली मुख्य सड़क कटान की जद में आ गई और देर रात यह सड़क पानी का दबाव न झेल पाने के चलते कट गई।
इस सड़क के कटने से करनैलगंज क्षेत्र के करीब 300 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। धनावा जाने वाली यह सड़क करनैलगंज से परसपुर वाया शाहपुर को भी आपास में जोड़ती थी। इस सड़क के कटने से करनैलगंज से परसपुर जाने का रास्ता भी बंद हो गया है।
करनैलगंज में अब तक बाढ़ की चपेट में आने से 46 गांवों के मुख्यमार्ग कट चुके हैं। इसके अलावा करीब 22 छोटी पुलिया भी पानी में समा चुकी हैं। शनिवार को घाघरा ने बांध को काटने का सिलसिला तेज कर दिया है। नकहरा, बेहटा व पारा गांव के सामने एल्गिन-चरसडी बांध में तेज कटान शुरु हो गई है।
शनिवार को नदी की कटान तेज होने से एल्गिन चरसड़ी बांध का करीब 20 मीटर से अधिक हिस्सा नदी में समा गया। इसके अलावा करीब चार सौ मीटर की लम्बाई में बांध के हिस्से में नद की कटान तेज हो गई है। तेजी के साथ फैल रहे घाघरा के पानी से बाढ़ प्रभावित गावों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
शनिवार को बाढ़ प्रभावित मजरों की संख्या बढ़कर 806 पर पहुंच गई। शनिवार को घाघरा का पानी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर स्थिर रहा और बाढ़ प्रभावित इलाकों का जलस्तर घटता नजर आया। इस घटते जलस्तर ने लोगो को राहत जरुर दी है लेकिन इससे बाढ़ से प्रभावित लोगों की दुश्वारियां बढने के आसार बढ़ गए हैें।