वहीं मांगों को पूरा किए जाने के लिए औषधि भवन पर इकट्ठा हुए दवा व्यापारियों ने कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। जो एडीएम कार्यालय के सामने पहुंचते-पहुंचते एक सभा में तब्दील हो गया।
यहां कुछ देर तक विरोध प्रदर्शन करने के बाद दवा व्यापारियों ने अध्यक्ष राकेश सिंह की मौजूदगी में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन को संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा। जबकि दूसरी ओर सतनाम सिंह की अगुवाई में जिले से सौ दवा व्यापारियों का एक दस्ता प्रदर्शन के लिए सुबह होते ही लखनऊ चला गया।
पूरी तरह ठप रहा कारोबार
जिले की चार तहसीलों सहित 16 ब्लॉकों में करीब 26 सौ से ऊपर दवा की दुकानें हैं। जहां हर रोज करीब 15 करोड़ रुपये के करीब दवा बिक्री का कारोबार होता है। लेकिन बुधवार को जिले भर की दवा दुकानों के बंद रहने से कोई भी व्यापार दवा का नहीं हो सका। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट कल्याण एसोसिशन के अध्यक्ष राकेश सिंह ने बताया कि बुधवार को दवा दुकानों की तालाबंदी से जिलेभर में करीब 15 रुपये से होने वाला दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा।
ई-फार्मेसी खत्म किए जाने के लगे नारे
बुधवार की दोपहर 12 बजे के करीब दवा व्यापारियों का हुजूम औषधि भवन पर इकट्ठा हुआ। जहां जुलूस में शामिल केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट कल्याण एसोसिएसन के अशोक रस्तोगी, सलाहुद्दीन खां, राकेश अग्रवाल, राकेश कुमार गुप्ता, दीपक अग्रवाल, हरदेव गुप्ता आदि ने सरकार की तरफ से लाई जा रही स्कीम ई-फार्मेसी के विरोध में नारेबाजी की। दवा व्यापारियों का कहना है कि अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो इसके दुष्परिणाम लोगों को झेलने पड़ेंगे।
सरकारी अस्पताल के दवा काउंटरों पर लगी लाइन
बुधवार को दवा व्यापारियों की हड़ताल पर जिला अस्पताल के दवा वितरण काउंटर पर मरीजों की दोपहर दो बजे तक भीड़ लगी रही। हालांकि यह भीड़ तो रोज ही लगती है, लेकिन बुधवार को जो भीड़ यहां दवा काउंटरों पर उमड़ी, उसमें अधिकांशत: मरीज सिरदर्द, बुखार, बदनदर्द की टेबलेट के लिए लाइन लगाए नजर आए। आम दिनों में यही मरीज दवा दुकानों से दवाई लेकर काम चला लिया करते थे, लेकिन बुधवार को दवा दुकानों के बंद रहने से इसके लिए उन्हें छोटी सी भी बीमारी की दवाई लेने के लिए जिला अस्पताल आना पड़ा।
शहर सहित ग्रामीण अंचलों में भी दिखा व्यापक असर
बुधवार को दवा व्यापारियों की तालाबंदी से इसका असर केवल मुख्यालय पर ही नहीं रहा, बल्कि जिलेभर में इसका व्यापक असर नजर आया। परसपुर से लेकर करनैलगंज, मनकापुर, धानेपुर, इटियाथोक, खरगूपुर, मसकनवा, बभनजोत, उमरीबेगमगंज, रगड़गंज, आर्यनगर, कटराबाजार, तरबगंज में स्थित सारी दवा की दुकानें बुधवार को पूरी तरह से बंद रहीं। जिनपर पूर्व निर्धारित तालाबंदी कार्यक्रम के पोस्टर लगे थे।
जिला अस्पताल में जो भी मरीज आए उन्हें यहां के दवा वितरण काउंटर से सारी दवाएं मुहैया कराई गईं। साथ ही जिले भर की सीएचसी-पीएचसी में भी दवाओं का स्टाक पहले से फुल कर लिया गया था। इस कारण मरीजों को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई है।
-डॉ. अमर सिंह कुशवाहा, सीएमओ गोंडा
हमने अपनी जिन-जिन मांगों को लेकर बुधवार को तालाबंदी की थी, वह पूरी तरह से सफल रही। जिले में 26 सौ से ऊपर दवा की दुकानें हैं, जो बुधवार को पूरी तरह से बंद रहीं। इस संबंध में एक ज्ञापन जिला स्तर पर एडीएम त्रिलोकी सिंह कौ सौंपा गया है। जबकि मुख्यालय से सौ दवा कारोबारियों का एक जत्था लखनऊ में प्रदर्शन के लिए गया था। बुधवार को दवा विक्रेताओं की दुकानों के तालाबंदी से करीब 15 करोड़ रुपये का दवा कारोबार प्रभावित रहा।
-राकेश सिंह, अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट कल्याण एसोसिएशन, गोंडा