गांव के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ग्राम पंचायत सदस्य मौजूदा व्यवस्था में महज प्रधानों के स्टांप बनकर रह गए हैं। गांव की सरकार में विकास कार्यों को लेकर बनने वाली समिति में निर्णायक साबित होने वाले ग्राम पंचायत सदस्य बदली राजनीतिक बयार में कोई खास असर नहीं छोड़ पा रहे हैं।
धन व बाहुबल की इस नई व्यवस्था में ग्राम पंचायत सदस्य पद से लोगों का मोह भंग हो रहा है। जिले में 2459 सदस्य सीटों पर किसी भी उम्मीदवार ने चुनाव लड़ने के लिए परचा ही नहीं भरा है। 5372 सीटों पर एकल नामांकन के चलते सदस्यों का निर्विरोध निर्वाचन हो गया है।
जिले की 801 ग्राम पंचायतों में सदस्यों की कुल 10 हजार 53 सीटें हैं। इसके सापेक्ष मात्र 2222 सीटों पर ही उम्मीदवारों ने ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा है।
इसके अतिरिक्त पांच हजार 372 सीटों पर एकल नामांकन के चलते ग्राम पंचायत सदस्यों का निर्विरोध निर्वाचन हो गया है। 2459 सीटों पर उम्मीदवारों ने सदस्य पद का परचा ही नहीं भरा जिसके चलते इन सीटों पर राज्य निर्वाचन आयोग को फिर से चुनाव कराना पड़ेगा।
प्रधान पदों पर लड़ने वाले उम्मीदवारों ने वैसे तो सदस्य सीट पर प्रत्याशियों को लड़ाने में काई रुचि नहीं दिखाई। नेतागिरी के माहिर प्रधान पद के सदस्यों ने बड़ी चतुराई से अपने करीबियों व रिश्तेदारों को ग्राम पंचायत सदस्य निर्विरोध मनोनीत कराने में सफलता प्राप्त की है।
ये आंकड़ा कितना है इसकी पुष्टि तो नहीं हो सकी लेकिन दबे जुबान ही सही करीबियों व रिश्तेदारों के मनोनयन को सभी मानते हैं।
जिला पंचायतराज अधिकारी उपेंद्र राज सिंह का कहना है कि वैसे से राज्य निर्वाचन आयोग से सदस्यों के दायित्वों का कोई स्पष्ट उल्लेख तो नहीं है लेकिन मौजूदा हाल में गांवों के विकास में सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। निष्पक्ष ढंग से विकास कार्य कराने में ग्राम पंचायत सदस्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
गवर्निंग बॉडी के सदस्य के रूप में ग्राम प्रधान के खिलाफ अभियोग लगाकर अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। ग्राम पंचायत में गठित होने वाली छह कमेटियों में सदस्यों का अहम रोल है।
खुली बैठकों में गांव में होने वाले विकास कार्यों व अन्य योजनाओं में सदस्यों का प्रस्ताव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ग्राम पंचायतों में सदस्यों की संख्या जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होती है। दो हजार तक आबादी वाले ग्राम पंचायतों में 11 सदस्य सीटों का आवंटन होता है।
दो हजार से तीन हजार आबादी के बीच 13 सदस्य सीटें निर्धारित हैं। तीन हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में 15 सदस्य निर्धारित किए जा सकते हैं। एक ग्राम पंचायत में 15 से अधिक सदस्य नहीं हो सकते।