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मनरेगा में 24.65 करोड़ का अटका भुगतान

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गोंडा। मनरेगा में रोजगार देने की कवायद हो रही है, लेकिन श्रमिकों को समय से मजदूरी ही नहीं मिल रही है। इसी वित्तीय वर्ष में 25 हजार से अधिक श्रमिक काम करने के बाद से भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। उनका चार करोड़ 65 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। वहीं, 1,214 ग्राम पंचायतों का भी 20 करोड़ रुपये का भुगतान फंसा है। भुगतान नहीं होने से अब निर्माण सामग्री उधार नहीं मिल पा रही है। इससे मनरेगा के भी काम प्रभावित हैं। सौ से अधिक पंचायतों ने काम ठप कर दिया है। श्रमिकों को रोजगार देने में पंचायत स्तर पर आनाकानी की शिकायतें भी मिल रहीं हैं। फिलहाल श्रमिकों की मजदूरी बकाया होने से काम में दिक्कत आ रही है।
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मनरेगा से 136 गांवों में अमृत सरोवर योजना से तालाबों के निर्माण के साथ ही एक दर्जन से अधिक परियोजनाओं का संचालन हो रहा है। मनरेगा में इस वित्तीय वर्ष में 27,702 श्रमिकों ने काम किया है और अब तक चार लाख 44 हजार 800 मानव दिवसों का सृजन हो सका है। प्रत्येक मानव दिवस के 213 रुपये प्रतिदिन की दर से श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान होना है। मनरेगा से बीते 14 मई से श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है।
इससे श्रमिकों का करीब चार करोड़ 65 लाख रुपये बकाया है। भुगतान नहीं होने से करीब 25 हजार श्रमिक परेशान हैं। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2021-22 में पंचायतों ने मनरेगा से कार्य कराए हैं और बाजार से उधारी पर निर्माण सामग्री भी क्रय की है। ऐसे में 1,214 पंचायतों का करीब 20 करोड़ रुपये भुगतान नहीं हो सका है। मार्च से ही पंचायतें इंतजार कर रहीं हैं, पुराना भुगतान न होने से दुकानदार अब उधार पर सामग्री देने से आनाकानी कर रहे हैं। इसका भी असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। (संवाद)
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विकास कार्य कराने और श्रमिकों को रोजगार देने के लिए मनरेगा से 173.27 करोड़ रुपये का बजट तय है। मार्च 2023 तक 51 लाख मानव दिवसों का सृजन किया जाना है। इसके लिए ब्लॉकों की जिम्मेदारी तय की गई हैं। योजनाओं से अधिक से अधिक दिनों तक कार्य देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कई कार्य होने हैं। अब तक जिले में 57,038 श्रमिकों ने ही रोजगार की मांग की है। जिसमें से 27,702 श्रमिकों को रोजगार दिया गया है। हर दिन काम जारी रखने की हिदायत सभी 1,214 पंचायतों को दी गई है। इसके बाद भी अक्सर सौ से डेढ़ सौ पंचायतों में काम ठप है। इससे भी श्रमिकों को रोजगार देने में दिक्कत आ रही है।
जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि मनरेगा से श्रमिकों का भुगतान सीधे उनके खाते में होता है। भुगतान की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गये हैं। इसके साथ ही अन्य समस्याएं दूर की जा रही हैं। अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार देने की योजना तैयार की गई है।
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