गोंडा। जिले में फाइलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। जिले में पिछले अभियान में स्वास्थ्य विभाग ने कुल 2387 रोगी चिह्नित किया है। स्वास्थ्य विभाग की खोज में मिला है कि क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छर के काटने से मरीज को बुखार सर दर्द आदि की समस्या होने के साथ उसके हाइड्रोसील व हाथी पांव (पैर में सूजन) बन जाने का खतरा रहता है। मच्छर से बचाव व समय समय पर दवा लेने से इस बीमारी से बचा जा सकता है।
जिला फाइलेरिया अधिकारी कंचन ने बताया कि कि क्यूलेक्स मच्छर के काटने पर पहले पता नही चलता है लेकिन यदि ब्लड की जांच करायी जाए तो पता चल जाएगा। उन्होंने बताया कि मच्छर काटने के डेढ़ दो साल बाद फाइलेरिया के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। इसमें संक्रमित व्यक्ति को बुखार, बदन में खुजली, जननांगों ने सूजन, हाथी पांव व हाइड्रोसिल की समस्या हो जाती है। इस बीमारी में मरीजों को दवा दी जाती है। हर छह माह में दवा रिपीट की जाती है। यह बीमारी दवा से खत्म नहीं होती है सिर्फ दवा से इसे कंट्रोल रखा जा सकता है।
शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी की जरूरत
फाइलेरिया की बीमारी यदि किसी ऐसे व्यक्ति को है जिसे शुगर की भी समस्या है उसे बहुत सावधानी बरते जाने की जरूरत है। डॉ. कंचन का कहना है कि शुगर से पीड़ित मरीज को फाइलेरिया हो जाने पर जिस अंग पर असर होता है उसमें छाले या दाने पड़ जाते हैं जिससे पस निकलने लगता है। ऐसे मरीज को नियमित जांच व दवा लेनी चाहिए। एमडीए की दवा सरकार की ओर से मुफ्त में दी जाती है यह दवा दो साल से कम बच्चों को, गर्भवती महिलाओं को व गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को नहीं खानी है।
बचाव के लिए दी जाने वाली दवा की डोज
2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को - 1 गोली
5 से 15 वर्ष तक के बच्चों को - 2 गोली
15 वर्ष से ऊपर के उम्र के लोगों को - 3 गोली