घोटाला सामने था, फिर भी मातहतों को बचाते रहे डीएम
गोंडा। 27 मई को वजीरगंज ब्लाक में एक निजी गोदाम मे पकड़ा गया सरकारी अनाज कोई एक दिन का खेल नहीं था। यह काफी समय से बड़े पैमाने पर खेला जा रहा था।
इसकी जानकारी भी खाद्य और रसद विभाग के सभी अफसरों को थी मगर इस पर अंकुश नहीं लगाया गया। विधायक के नेतृत्व में जब तहसील प्रशासन की टीम ने अवैध गोदाम पर छापा मारा तो अनाज घोटाला एक बार फिर चर्चा में आ गया।
छापेमारी में मिले हजारों बोरा अनाज खुद घोटाले की कहानी बयां कर रहा था मगर जिलाधिकारी जेबी सिंह ने त्वरित कार्रवाई नहीं की। अनाज घपले में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश को भी डीएम ने हल्के में लिया और इस घपले में शामिल अपने मातहतों को बचाने में जुटे रहे।
इसका नतीजा गुरुवार को डीएम के निलंबन के रुप में सामने आया। साथ ही डीएसओ व खाद्य विपणन अधिकारी को निलंबित कर यह संदेश भी दिया गया कि डीएम को अपने स्तर से ही प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
वजीरगंज ब्लॉक के बंधवा गांव के कोदई बगिया में संचालित एक निजी गोदाम से अनाज की कालाबाजारी की सूचना पर प्रशासन की टीम ने तरबगंज विधायक प्रेमनरायण पांडेय की मौजूदगी में 27 मई को छापेमारी की थी।
इस छापेमारी के बाद यह बात साफ हो गई थी कि कालाबाजारी का यह पूरा खेल विभाग के अफसरों की देखरेख में खेला जा रहा था। सीएम के सख्त रवैये को देखते हुए इस मामले में विभाग के बड़े अफसरों पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही थी मगर जिलाधिकारी ने बड़े अफसर तो दूर छोटों के खिलाफ भी कार्रवाई करना जरूरी नही समझा।
इस मामले की शिकायत जब शासन में पहुंची तो वहां से एक सेंट्रल टीम का गठन कर इसके जांच के आदेश दिए गए। रविवार को जब शासन की टीम जिले में पहुंची तब भी घपलेबाजों को बचने का पूरा भरोसा था।
मगर जब तीन दिन तक बात नही बनी तो बुधवार को एक गोदाम प्रभारी व पूर्ति निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया। यहां भी डीएम ने इस घपले में शामिल बड़े अफसरों को बचाने की कोशिश की और गुरुवार को वह खुद कार्रवाई की जद में आ गए।