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5 ीं बार निरस्त हुआ 5 करोड़ का टेंडर

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5 वीं बार निरस्त हुआ 5 करोड़ का टेंडर
दो प्लाटून पीएसी और क्यूआरटी तैनात थी पावर कॉर्पोरेशन के दफ्तर पर
हर बार टेंडर की तारीखों के साथ बदलती गई शर्तें फिर भी नहीं बनी बात
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। पावर कॉर्पोरेशन के दफ्तर पर पड़ने वाला पांच करोड़ का टेंडर मंगलवार को पांचवी बार से निरस्त कर दिया गया। टेंडर के दौरान होने वाली किसी प्रकार की अराजकता से निपटने के लिए बुलाई गई क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) को उल्टे पैर लौटना पड़ा। संविदा कर्मियों की आपूर्ति के लिए पड़ने वाले इस टेंडर के फिर निरस्त होने से जहां कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं। अमर उजाला पहले ही इस बात को प्रमुखता के उठा चुका है इस टेंडर पर नेताओं और माफिया की नजरें लगी है।
जुलाई में खत्म हुए 450 संविदा बिजली कर्मियों की आपूर्ति का टेंडर पावर कॉर्पोरेशन दो महीने बीत जाने के बाद भी अब तक नहीं करा पाया है। जबकि नए सिरे से टेंडर की कार्रवाई लगातार तीन महीनों से होती चली आ रही है। बावजूद इसके किसी न किसी कारण से हर बार कभी टेंडर की तारीख बढ़ा दी जाती है तो कभी टेंडर ही निरस्त कर दिया जाता है। मंगलवार को पावर कॉर्पोरेशन के दफ्तर पर बिना किसी व्यवधान के टेंडर पड़ें, इसके लिए अधीक्षण अभियंता ने एसपी से मिलकर दो प्लाटून पीएसी तक मंगवा रखी थी। साथ ही क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) को भी बुलाया गया था। लेकिन बिजली दफ्तर पहुंचकर टीमों ने मोर्चा संभाला ही था कि पता चला कि टेंडर एक बार फिर से निरस्त कर दिया गया है।
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गौरतलब है कि इससे पहले 1 जुलाई को पावर कॉर्पोरेशन ने गोंडा, बहराइच दो जिलों में संविदाकर्मियों की आपूर्ति का टेंडर निकाला थी। जिसे 1 जुलाई से बढ़ाकर 17 जुलाई किया गया। 17 जुलाई को बहराइच का तो टेंडर फाइनल हो गया। लेकिन गोंडा में टेंडर की तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई। 31 जुलाई को छह फर्मों ने टेंडर भी डाला। लेकिन टेंडर पडने के बाद एक अगस्त को ही यह टेंडर निरस्त कर दिए गए। जिसके बाद नए सिरे से 21 अगस्त फिर 6 सितम्बर और मंगलवार को 12 सितम्बर की तारीखें टेंडर डालने के लिए तय की गईं और हर बार ही टेंडर किसी न किसी कारण से स्थगित कर दिया गया। खास बात यह भी है कि टेंडर की तारीख बदलने के साथ ही शर्तें भी बदलती गईं। पहली बार टेंडर डालने वाली फर्मोँ के सामने दो साल के अनुभव और एक साल की ईपीएफ जमा पर्ची की शर्त रखी गई तो दूसरी बार हैसियत व करेक्टर सर्टिफिकेट की। तीसरी बार सारी शर्तें हटाकर 20 लाख टर्नओवर की शर्त रख दी गई तो बाद में सब कुछ नार्मल कर दिया गया।
इनसेट
कहीं फुटकर में टेंडर के लिए तो नहीं रहा खेल
सूबे के तमाम जिलों में सेवा प्रदाता आधारित फर्मों से बिजली कर्मियों की आपूर्ति के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने इसका टेंडर फुटकर में निकाल रखा है। मसलन पूरे जिले में अगर 25 बिजलीघर हैं, तो उसका टेंडर एक साथ न होकर 5-5 बिजलीघरों के टुकड़ों में होता है। जबकि गोंडा में इसका टेंडर एकमुश्त 25 बिजलीघरों के लिए निकाला गया है। यानि जो कोई भी सेवा प्रदाता इसका काम लेगा, वह सीधे-सीधे साल भर में पांच करोड़ के काम का ठेकेदार होगा। जिसके लिए नेताओं से लेकर तमाम माफिया और रसूख के धनी लोगों की निगाहें इस टेंडर पर गड़ी हैं। वहीं पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी एकमुश्त पूरे जिले का टेंडर न करके इसेे फुटकर में कराने की फिराक में हैं।
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वर्जन
संविदा बिजलीकर्मियों की आपूर्ति सेवा प्रदाता फर्मों से लिए जाने के लिए मंगलवार को इसका टेंडर डाला जाना था, जो अपरिहार्य कारणों से फिलहाल के लिए निरस्त कर दिया गया है। नए सिरे से टेंडर का प्रकाशन करवाकर इसकी तिथि जल्द ही घोषित कर दी जाएगी। तब के लिए जो फर्म पहले से काम कर रही है, उसकी सेवा का विस्तारीकरण कर दिया गया है।
-आरके श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता, देवीपाटन जोन
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