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पांच हजार हेक्टेयर में शरदकालीन गन्ने की होगी बोवाई

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पांच हजार हेक्टेयर में होगी गन्ने की खेती
गन्ना विभाग ने किसानों को गन्ने की सह फसली खेती के लिए प्रोत्साहित करने का तैयार किया प्लान
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। इस बार जिले में पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की बोवाई होगी। शरदकाल में बोवाई किये जाने वाले गन्ने के खेत में किसानों को सहफसली खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे किसानों की आय दोगुनी होगी। किसान गन्ने के फसल के साथ में सब्जियों के अलावा अन्य खाद्यान्न भी उपजाएगा। इससे किसानो की आथक स्थिति में सुधार आएगा। गन्ना विभाग ने इस बार किसानों को सहफसली खेती के लिए तैयार करेगा। डीसीओं की ओर से अभी से ही सभी गन्ना निरीक्षकों, गन्ना समिति के सचिवों को इस बावत निर्देश दिये गये हैं। इस बावत गन्ना किसानों व गन्ना विशेषज्ञों का मानना है कि अर्ली वैरायटी के गन्ने की टे्रंच विधि से गन्ने की बोवाई की जाएगी। शरद काल में बोई गई गन्ने की फसल पेराई सत्र में जल्द पक कर तैयार हो जाती है इससे किसानों को जल्द गन्ना बेचने से कई तरह के फायदे एक साथ मिल जाते हैं। इसके अलावा खेत में बोए गये गन्ने के खेत में गन्ने की नालियों के बीच में किसान कई अन्य फसलों को भी उपजा लेता है। इससे किसानों को लाभ होता है। अभी जिले में मुश्किल से पांच फीसद लोगों ने सहफसली खेती को अपनाया है।
इनसेट

शरदकाल में बोई जाने वाली गन्ने की अर्ली वैरायटी
* 0238, * 118, * 94184, * 8272, * 94014 ।

इनसेट
गन्ने की सह फसली खेती के फायदे
गोंडा। गन्ने की सहफसली खेती के दो गुने फायदे हैं या यूं कहा जाए कि इस विधि से गन्ने की खेती से किसानों की आय सीधे दो गुना हो सकता है। इसके लिए किसानों को गन्ने की परम्परागत खेती से हटकर नयी व वैज्ञानिक विधि से खेती करनी होगी। सहफसली खेती से किसानों को गन्ने की फसल से अधिकतम उत्पादन तो मिलता ही है। गन्ने के अलावा उसके साथ ली जाने वाली सब्जियों, चना, मसूर, सरसों, मटर, धनिया, लहसुन, आदि की फसलों से मिलने वाला धन किसानों की अतिरिक्त आय होगी। इस बावत मैजापुर चीनी मिल के अपर महाप्रबन्धक गन्ना पीके चतुर्वेद्वी का कहना है कि सहफली खेती करने वाले किसान के खेत से एक बीघे में 120 क्विंटल प्रति गन्ना उत्पादन प्राप्त किया है। उसके साथ बोई गई फसल से प्राप्त उपज किसान की अतिरिक्त आय होती है इससे किसानों की आमदनी में इजाफा होता है।
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इनसेट
गन्ना किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर खाद व दवाएं
गोंडा। गन्ना किसानों को गन्ना समितियों से गन्ने की बोवाई के लिए खाद व दवाएं 50 प्रतिशत के अनुदान पर दी जाएंगी। इसके लिए किसानों का पंजीयन कराना अनिवार्य है। किसानों को सब्सिडी पर खाद व दवाएं केवल पंजीकृत किसानों को ही मिल सकेगा। किसानों को गन्ना समितियों से डीएपी, युरिया पोटाश आदि खाद के अलावा गन्ने के खेत की भूमि व गन्ने के बीज शोधन के लिए रासायनिक दवाएं अनुदान पर मिलेगी।
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वर्जन
किसानों को शरद कालीन गन्ने की सहफसली खेती करने से उन्हें दो गुनी आय मिलेगी। सहफसली खेती से किसानों के गन्ने के खेती की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। इस बार अक्टूबर माह से गन्ने की शरदकालीन सहफसली खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस बार करीब 5000 हेक्टेयर शरदकालीन गन्ने की सहफली बोआई कराने का लक्ष्य है। किसानों को खाद दवाएं अनुदान पर मुहैया करायी जाएगी।
- पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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