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ध्वस्त हो गया पीएम आवास के लिए आवेदन जमा कराने का तानाबाना

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लाखों ग्रामीणों के आने से ठप हो गया शहर
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गोंडा। जिला प्रशासन की एक नासमझी भरे कदम से शुक्रवार को पूरा शहर कराह उठा। प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन करने प्रशासन के बुलावे पर जिले भर से पहुंचे करीब पांच लाख लोगों की भीड़ के आ जाने से शहर ठप हो गया। विकास भवन में बिना तैयारी के प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत आवास दिलाने के लिए आवेदन जमा कराने बनाया गया तानाबाना घंटे भर में ध्वस्त हो गया। प्रशासन ने लोगों को पहले आवास के लिए आवेदन करने को बुलाया फिर भीड़ देख उन्हें उल्टे पांव लौटा दिया।
ऐसे लोग जिनके पास रहने को पक्का घर नही है शासन की ओर से ऐसे परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास बनाने के लिए नगद धन दिये जाने की व्यवस्था है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित लाभार्थी के खाते में तीन किश्तों में 1.20 लाख रुपये आवास बनाने के लिए भेजा जाता है। पिछले दिनों कई ब्लाकों में इस योजना में आवास के नाम बड़ा घोटाला किये जाने का खुलासा हुआ था। इस पर सीडीओ दिब्या मित्तल के निर्देशन में विकास भवन में शुक्रवार को आवास के लिए लाभार्थियों के हाथों आवेदन पत्र जमा कराने के लिए मेले का आयोजन किया गया था। इसके लिए बाकायदा पिछले एक सप्ताह से इसके लिए मीडिया व अन्य कार्यक्रमों के जरिये जिले भर में प्रचार प्रसार कराया गया था। प्रशासन ने जिले भर में विकास भवन में आवास के लिए मेला आयोजित करने का ढिंढोरा तो पिटवा दिया लेकिन इसका अन्दाजा नही लगाया कि कितनी भीड़ आएगी और उसके लिए क्या क्या और इंतजाम किया जाना चाहिए। सुबह 10 बजे ही विकास भवन पर करीब एक लाख लोग पहुंच चुके थे। सीडीओ की मानीटरिंग में विकास भवन परिसर में ब्लाकवार आवेदकों से फार्म जमा कराने के काउंटर बनाये गये थे। देखते ही देखते भीड़ से विकास भवन का दम घुटने लगा। उम्मीद से कई सौ गुना भीड़ देख अधिकारियों कर्मचारियों के हाथ पांव फूल गये। भीड़ देखकर मुख्य विकास अधिकारी दिव्या मित्तल को भी अपना निर्णय बदलना पड़ा । उन्होंने खुद माइक संभाला और लोगों को वापस अपने घर जाने व ब्लाक में आवेदन पत्र जमा कराने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने भीड़ को देखकर और अधिकारियों व पुलिस को बुलाया काफी मशक्कत के बाद लोगों को परिसर से बाहर कर मुख्य गेट पर ताला जड़वा दिया। लेकिन आवेदन न जमाकर पाने की बात से लोग गेट पर घण्टों जमा रहे। इसके बाद उन्हें समझाने व तसल्ली देेने के लिए उनके आधार कार्ड गेट पर लिये जाने लगे। सीडीओ को बार बार माइक से लोगों से वापस घर जाने व अपने ब्लाक में आवेदन जमा करने की अपील करनी पड़ी। वहीं वापस लौटाए जाने पर ग्रामीण काफी आक्रोशित व मायूस रहे। इस तरह से भीषण गर्मी में लोगों को वापस लौटाए जाने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिला मुख्यालय से एक किलोमीटर से लेकर 70 किलो मीटर की दूरी से लोग आवास को लेकर चल कर आये थे। ग्रामीण खुद को ठगा महसूस कर रहे थे। इसमें पुरूषों से अधिक महिलाओं की तादात थी। तमाम महिलाएं तो इस धूप में अपने गोद के बच्चों को भी लेकर आयी थी जो धूप व गर्मी से बिलख रहे थे। लोगों को आवास तो नही मिला लेकिन उन्हें बाहर करने व लौटाए जाने के दौरान झिड़कियां जरूर मिलीं। जिला प्रशासन के बिना तैयारी के इस तरह मेले में लोगों को बुलाकर फिर उन्हें बैरंग लौटाने के दर्द से पूरा जिला कराह उठा । वहीं शहर में एक साथ करीब पांच लाख लोगों की भीड़ जमा हो जाने से पूरा शहर करीब पांच घंटे के लिए ठप पड़ गया। जाम से हर रोड पर लोग जाम से जूझते रहे।
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20-20 रुपये में बिके फ्री बंटने वाले फार्म
जो लोग पहले विकास भवन में पहुंच गये थे अचानक भीड़ बढ़ जाने से जब लोगों को वापस किया जाने लगा तो उसमें से सभी को अपने गांव में फार्म बांटने के लिए ज्यादा ज्यादा दे दिया गया। इसमें तमाम फार्म गलत लोगों के हाथ लग गये कचेहरी में कई लोग उस फार्म को जरूरत मंदों को 20-20 रुपये में बेच कर लोगों को ठगते रहे। वहीं फार्म भरवाने के लिए भी लाभाथयों से लोगों ने 100-100 रुपये वसूल किये।

कड़क धूप में छांव की पनाह तलाशते रहे लोग
गोंडा। ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से चल कर आने का सफर उस पर आसमान से आग बरसाती क्वार महीने की धूप लोगों को मोम की तरह पिघला रही थी। ऐसे में हर कोई सिर छिपाने के लिए यहां वहां छांव की पनाह ढूंढ रहा था। विकास भवन के आसपास यहां तक कि पूरे शहर में कार्यालय,मकान,छहार दिवाल,पेड़ व वाहन जहां जिसको छांव दिखी बैठ जाता। गर्मी की शिद्दत से परेशान लोग स्टेशन व बस स्टाप से पैदल चलकर आये थे।

गला तर करने को पानी की तलाश में भटके
गोंडा। प्रशासन ने आवास के लिए मेला तो लगा दिया लेकिन इसकी ध्यान नही रखा की इस भीषण गर्मी में लोग दूर दराज से आयेंगे जिसमें महिलाएं व उनके साथ उनके गोद में मासूम बच्चे भी होंगे ऐसे में उन्हें पानी की जरूरत पड़ेगी। दूर दूर से पैदल चलकर आना और भीषण तपिश से लोगों के बार बार हलक सूख रहे थे । एक तो पहले उन्हें जल्द विकास भवन पहुंचने की फि क्र और फिर वहां से बैरंग लौटाए जाने की मायूसी से लोग बेजार थे। ऐसे में वह पीने का पानी तलाश रहे थे। प्रशासन की ओर से लोगों के पानी पीने का कोई इंतजाम नही किया गया था। महिलाएं अपने बच्चों को प्यासा देख बार बार उन्हें अपने पल्लू से धूप से बचाने के लिए छिपाने का प्रयास कर रही थीं। कहीं नल मिल दिखता तो वहां लोगों की पानी पीने की लाइन लग जा रही थी।
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बच्चों को गोद लिए 10-10 किलोमीटर चलीं महिलाएं
गोंडा। आवास के लिए आवेदन जमा करने आयीं महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ा। भीड़ देख जिला प्रशासन ने टैम्पों आदि के वाहनों का मुख्य मार्ग पर संचालन बन्द करा दिया। ऐसे में लोगों महिलाओं को अपने बच्चों को लादे लादे स्टेशन व बस स्टाप तक पैदलए चलती दिखीं। तमाम महिलाएं व पुरूष ऐसे भी आए थे जो इस तपिश में बगैर चप्पल के थे उनके पांव में तपती सड़क पर चलने से छाले भी पड़ गये।
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