उपचार के बाद बच्चों की तबियत में कुछ सुधार हुआ। सूचना पर खंड शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।
गुरुवार को स्कूल में बच्चों ने दूषित एमडीएम परोसे जाने के खिलाफ विरोध भी जताया। यह घटना प्राथमिक विद्यालय नंदमहरा में हुई जहां बुधवार को बच्चों को एमडीएम में कोफ्ता चावल तथा दूध दिया गया था। छुट्टी के बाद बच्चे घर पहुंचे तो उन्हें पेट दर्द, उल्टी व दस्त होने लगी।
अभिभावक राधेश्याम, सनेही, मो. युनुस, जुमाई, आशाराम, लाला, ननके आदि के मुताबिक स्कूल से घर लौटे छात्र अकबर अली, अशोक, राज कुमार, राबिया, सुुुभाष, वीरेन्द्र, विजय, अजय, सोहन, सुषमा, राजेश, राज कुमारी, गोलू, मंशा, अनीता, विजय, पवन कुमार, ममता, शिव कुमार व प्रभावती बीमार हो गए।
अभिभावकों के मुताबिक बच्चों की तबियत स्कूल का खाना खाने से खराब हुई। परिवारीजनों ने बीमार बच्चों को इलाज के लिए आननफानन तुलसीपुर स्थित प्राइवेट व सरकारी अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद बच्चों की हालत में सुधार हुआ।
बुधवार देर रात तक बच्चों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। बच्चों का इलाज करने वाले डाॅक्टरों ने बताया कि बच्चों में प्राथमिक तौर पर फूड पॉयजनिंग के लक्षण मिले। बच्चों की सेहत ठीक होने पर परिवारीजनों ने राहत की सांस ली है।
गुरुवार को स्कूल में मौजूद शिक्षामित्र विजय कुमार ने बताया कि बच्चों को बुधवार को एमडीएम में कोफ्ता-चावल तथा दूध दिया गया था। स्कूल में कोई भी बच्चा बीमार नहीं हुआ था। घर जाने के बाद बच्चों की तबियत बिगड़ने की जानकारी मिली।