नौनिहालों की यूनीफार्म का 6.25 करोड़ का बजट फंसा
गोंडा। जिले के 3140 परिषदीय स्कूलों के 3.27 लाख बच्चों की यूनीफार्म का 6.25 करोड़ रुपये का बजट फंस गया है। विभाग की लापरवाही से स्कूलों में बजट न जाने से प्रधानाध्यापकों को उधारी का तगादा सुनना पड़ रह है।
यूनीफार्म वितरण के कई महीने बाद भी बजट न भेजा जाना चौंकाने वाला है। बीएसए के कड़े तेवर देख डंप बजट स्कूलों के खातों में भेजने के लिए पत्रावलियां तैयार की जा रहीं हैं।
हर साल यूनीफार्म वितरण के लिए सभी अधिकारी दबाव बनाते हैं लेकिन वितरण के बाद यूनीफार्म की फाइल निपटाने की तरफ ध्यान नहीं रहता। इसी तरह एनपीआरसी व बीआरसी का बजट भी फाइलों में ही डंप है।
यूनीफार्म के लिए 12.50 करोड़ का बजट जारी हुआ था। बजट में कई तरह का घोलमेल सामने आया। अधिकारियों ने कई मामलों की छानबीन कर रिपोर्ट दी तब भी 6.25 करोड़ रुपये का बजट विभाग रोके रह गया।
बताया जा रहा है कि अब नए सत्र में फिर स्वेटर के वितरण के निर्देश आ गए हैं। इसके लिए भी कवायद शुरू हो गई है। इसके बाद अब यूनीफार्म का अवशेष बजट जारी किए जाने की कवायद शुरू हुई।
वैसे बिना कारण अभी तक बजट रोके रखने के चलते सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े कुछ लोगों पर प्रशासन की नजर टिकी है। बीएसए बीएसए मनिराम सिंह के कड़े तेवर के बाद डंप बजट स्कूलों के खातों में भेजने के लिए पत्रावलियां तैयार की जा रहीं हैं।
इस बार सर्दी शुरू होने से पहले बच्चों को स्वेटर देने की तैयारी शुरू हो गई है। वितरण के लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। 31 अक्तूबर तक हर हाल में स्वेटर वितरित किया जाना है। इसके लिए अक्तूबर के पहले हफ्ते में ही तैयारी पूरी कर ली जाएगी।
कस्तूरबा स्कूलों की दशा सुधारने को बीएसए मनिराम सिंह ने स्कूल की वार्डेन व लेखाकारों के साथ बैठक की। स्कूलों की साफ-सफाई के साथ ही रंगाई-पुताई पर जोर दिया।
पढ़ाई में गुणवत्ता, मीनू के अनुसार भोजन देने, नामांकन व शत-प्रतिशत उपस्थिति कराने के साथ ही गतिविधियों के आयोजन के बारे में विस्तार से बताया।
एक हजार रुपये मासिक मानदेय पर सफाई कर्मी रखने की व्यवस्था है, इतने पर भी कर्मी नहीं मिल पाते। इनका मानदेय दो हजार किए जाने पर चर्चा हुई।
अब शुक्रवार को डीएम की अध्यक्षता में बैठक होना तय हुआ। बैठक में सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. रमेश चौबे व जिला समन्वयक रजनी श्रीवास्तव के साथ ही सभी वार्डेन व लेखाकार मौजूद रहे।