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महेवा नानकार में स्थापित होगा कृषि विज्ञान केंद्र

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महेवा नानकार में बनेगा कृषि विज्ञान केंद्र

गोंडा। किसानों की उपज का समर्थन मूल्य बढ़ाने के साथ भारत सरकार सभी बड़े जिलों में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने जा रही है। गोंडा के मनकापुर तहसील के महेवा नानकार गांव में कृषि विज्ञान केंद्र खुलेगा।

इसके लिए भारत सरकार ने अपनी स्वीकृति देते हुए दो कृषि वैज्ञानिकों की तैनाती भी कर दी है। कृषि विज्ञान केंद्र स्थापना के लिए सरकार ने नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय फैजाबाद से इस्टीमेट तैयार करने को कहा है।
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खेती किसानी में सुधार के लिए यह अभिनव पहल है। हालांकि कि जिले में दीनदयाल शोधसंस्थान के तहत गोपाल ग्राम में एक कृषि विज्ञान केंद्र संचालित है। यह केंद्र दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है।

लेकिन भारत सरकार ने प्रदेश में 20 ऐसे बड़े जिलों में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने जा रही है जिसका संचालन कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा किया जाएगा। इसमें गोंडा में भी मनकापुर के महेवा नानकार गांव में भूमि का चयन किया गया है।

यहां 50 एकड़ भूमि की उपलब्धता हो गई है। सरकार ने केंद्र स्थापना की स्वीकृति प्रदान करते हुए दो कृषि वैज्ञानिकों की नियुक्ति कर दी है। होम साइंस की डॉ. अर्चना सिंह व एग्रोनामी के विशेषज्ञ डॉ. राम लखन की तैनाती हुई है।

कृषि विज्ञान केंद्र खुल जाने से किसानों को बीज शोधन, नई तकनीक से खेती करने का प्रशिक्षण मिल सकेगा। नई बीजों का उत्पादन होगा। नए शोध होंगे। नए कृषि यंत्रों के प्रयोग व उसके लाभ के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

भारत सरकार ने दे दी स्वीकृति

मनकापुर तहसील के महेवा नानकार में 50 एकड़ भूमि की उपलब्धता हो गई है। भारत सरकार ने स्वीकृति भी दे दी है। नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय द्वारा केंद्र का संचालन किया जाएगा।

इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन इस्टीमेट तैयार करेगा जिससे भवनों का निर्माण होगा। इसके लिए अलग से वित्तीय बजट होता है जो हर बजट में विज्ञान केंद्रों को दिया जाता है।
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-डॉ. मुकुल तिवारी, उपनिदेशक कृषि

आधुनिक खेती को मिलेगी तरक्की

कृषि विज्ञान केंद्र खुल जाने से जिले के करीब साढ़े चार लाख किसानों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। किसानों को आधुनिक यंत्र की जानकारी मिलेगी। कम खेती में अधिक उत्पादन कैसे हो इसकी जानकारी मिलेगी।
जनसंख्या बढ़ोत्तरी के साथ जमीन कम हो रही है इसलिए कम जमीन में अधिक उत्पादन करना इस पर अधिक जोर रहेगा। इसका फायदा किसानों को मिलेगा।
-डॉ. उपेंद्र सिंह, समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम
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