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उज्जवला गैस योजना में उपभोक्ताओं से वसूली

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उज्जवला योजना में उपभोक्ताओं से तीन हजार की वसूली
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ढाई लाख कार्ड धारकों में से सिर्फ डेढ़ लाख को मिला कनेक्शन
आर्थिक तंगी से गैस की समय से रिफिंलग नहीं करा पा रहे उपभोक्ता
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। भारत सरकार की उज्जवला गैस कनेक्शन योजना में भी भ्रष्टाचार का घुन लग गया है। जिले में कुल 2.50 लाख बीपीएल परिवारों में से अभी तक मात्र 1.50 लाख लाभार्थियों को ही उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिल पाया है। एक लाख कार्ड धारकों में अधिकतर को पैसा न देने के कारण कनेक्शन नहीं मिला। उपभोक्ताओं से गैस एजेंसियां प्रति कनेक्शन तीन हजार तक वसूल रही हैं।

जिले में उज्जवला योजना की शुरूआत तीन साल पहले हुई थी। जिले के कुल 2.50 लाख परिवार को इस योजना का लाभ दिया जाना था लेकिन अभी तक मात्र 1.50 लाख लाभार्थी ही इससे जुड़ सके हैं। इस योजना को सफल बनाने के लिए लगाए गये अधिकारी भी गैस एजेन्सी के भ्रष्ट तंत्र से मिल गये जिससे गैस कनेक्शन के नाम पर गैस एजेन्सियों के कर्मचारियों की ओर से वसूली की जाने लगी। गैस एजेन्सियों ने अपनी बदनामी से बचने के लिए बिचौलियों को बीच में लगाकर गरीब परिवारों से 500 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक वसूली की। इससे तमाम गरीबों ने कर्ज लेकर कनेक्शन के नाम पर पैसा दिया तो तमाम गरीब पीछे हट गये। सही मानीटरिंग न होने से गरीबों की आवाज दब कर रह गई। वहीं इस योजना के सफलता की कसौटी पर गरीब उपभोक्ताओं के सामने गैस की रिफिलिंग के लिए फण्ड की समस्या है। वह 600 से 700 रुपये एक साथ दे पाने में असमर्थ है जिससे कई ऐसे उपभोक्ता है जो एक या दो बार गैस भरवाने के बाद फिर हिम्मत नही जुटा सके।
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इनसेट
केस एक-
तीन हजार न देने पर नहीं मिला कनेक्शन
गोंडा। ग्राम पंचायत सोनापार के बीपीएल कार्डधारक राम अक्षयबर से गैस एजेन्सी के कर्मियों ने कनेक्शन के नाम पर तीन हजार रुपये मांगा। अक्षयबर का कहना है कि उनसे गैस कनेक्शन के नाम पर तीन हजार रुपये मांगे गये न दे पाने पर उसे आज तक कनेक्शन नही मिल पाया। उसका कहना है गैस कनेक्शन के लिए उसने अधिकारियों से भी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नही हुई।

इनसेट
केस दो-
500 वसूल लिए कर्मचारी ने
गोंडा। रूपईडीह क्षेत्र के ग्राम इमिलिया भगवानदीनपुरवा निवासनी पूनम देवी का कहना है कि उन्हें काफी मशक्त के बाद गैस का कनेक्शन मिल पाया था। इसके लिए उससे गैस एजेन्सी के कर्मचारी ने पांच सौ रुपये वसूल किये थे। उसका कहना था कि कर्मचारी ने धमकाया था कि पांच सौ रुपये नही दोगी तो गैस कनेक्शन बहुत देर में मिल पाएगा।

इनसेट
आर्थिक तंगी बना गैस की रिफिलिंग में रोड़ा
गोंडा। गैस कनेक्शन पाने के बावजूद अभी कई परिवार लकड़ी पर ही खाना बनाने पर मजबूर है। एक तो पुरानी पम्परा रही है दूसरी आर्थिक कमजोरी है। एक साथ गैस रिफिलिंग के 600 से 700 रुपये देना गरीब परिवार के लिए मुश्किल है। भगवानदीनपुरवा निवासी पूनम ने डेढ़ साल पहले गैस सिलेण्डर लिया था लेकिन तब से वह मात्र एक बार रिफिल कराया है। उनका कहना है कि मौके से इतना अधिक पैसा न होने के कारण गैस नही भरवा सकी। मजबूरन लकड़ी पर भी खाना बनाना पड़ता है। इसी तरह से भंगहा गांव की चन्द्रावती का कहना है कि डेढ़ साल से वह सिर्फ तीन बार ही गैस की रिफिंलग करवा सकी है।

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उज्जवला योजना के ये हैं मानक
गोंडा। भारत सरकार की ओर से संचालित की जा रही उज्जवला योजना में गरीब बीपीएल परिवार को नि:शुल्क गैस सिलेण्डर चूल्हा दिया जाना है। लाभार्थी को इसके लिए गैस एजेन्सी संचालक को अपनी फोटो,बैंक पास बुक की फोटो कापी,आधार कार्ड की फोटो कापी,राशन कार्ड व वोटर कार्ड आदि की केवाईसी देनी है।

इनसेट
उज्जवला योजना में लाभार्थियों की स्थिति
* कुल गैस एजेन्सियां - 33
* जिले में कुल बीपीएल परिवार 2.50 लाख
* कुल उज्जवला योजना के लाभार्थी - 1.50 लाख

इनसेट
लाभार्थियों की दिक्कतें तो ये भी हैं
उज्जवला योजना के तहत बीपीएल परिवार के लाभार्थियों के सामने कई दिक्कतें हैं। एक तो गरीब परिवार का होने के नाते गैस कनेक्शन बांटने की जिम्मेदारी पाने वाली एजेंसियां अपने कर्मचारियों से खर्च के नाम पर वसूली कराने से बाज नही आ रही हैं। इससे वसूली व घूसखोरी के नाम पर लाभार्थी अपना हक लेने से पीछे हटने को मजबूर हुए। इसके अलावा बीपीएल परिवार के लोगों के पास गैस की रिफिलिंग के लिए इकट्ठा 600 से 700 रुपये तक दे पाने की असमर्थता भी गैस की हर माह रिफिलिंग न हो पाने की वजह रही। इससे सरकार की मंशा के अनुरूप उज्जवला योजना के तहत गरीबों को लाभ नही मिल पा रहा है।
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किसी लाभार्थी को पैसा मांगने की वजह से गैस कनेक्शन न मिलने की शिकायत मिली तो सम्बन्धित गैस एजेंसी संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी जाएगी। लोग गैस कनेक्शन पाने के बाद भी गैस की रिफिलिंग न कराने वाले लाभार्थियों की काउंसलिंग कर उन्हें प्रेरित किया जाएगा।
पूरन सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
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